वाल्मीकिनगर बराज का गेट टूटा, बाढ़ का खतरा

ओवरफ्लो कर रहा था पानी, सोये थे कर्मी वाल्मीकिनगर (बगहा) : गंडक में पानी बढ़ने से बिहार व यूपी के कई जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. नेपाल के विभिन्न इलाकों में हो रही बारिश से गंडक में अचानक पांच लाख क्यूसेक पानी आ गया, जिसकी वजह से वाल्मीिकनगर बराज पर पानी का […]

ओवरफ्लो कर रहा था पानी, सोये थे कर्मी
वाल्मीकिनगर (बगहा) : गंडक में पानी बढ़ने से बिहार व यूपी के कई जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. नेपाल के विभिन्न इलाकों में हो रही बारिश से गंडक में अचानक पांच लाख क्यूसेक पानी आ गया, जिसकी वजह से वाल्मीिकनगर बराज पर पानी का दबाव बढ़ गया है. इसके चलते गेट नंबर 33 टूट गया. इससे पूरे बराज के सिस्टम पर असर पड़ा है.
यहां के गेटों का ऑटोमेशन सिस्टम खराब हो गया है, जिसकी वजह से कर्मचारियों की मदद से गेटों (मैनुअली) को उठाया गया. साथ ही फाटकों का बराज के कंट्रोल रूम से संपर्क भी टूट गया है. बराज में रात में जब पानी बढ़ रहा था, तो तैनात कर्मचारी सो रहे थे. पानी जब खतरे के निशान से ऊपर होकर बहने लगा, तो ड्यूटी पर तैनात एसएसबी के जवानों ने बराज कर्मियों को सूचना दी और उन्हें नींद से जगाया, जिसके बाद से फाटकों को खोलने का काम किया जा रहा है.
सो रहे थे बराज पर तैनात कर्मचारी : गंडक के बराज में पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया.इसकी जानकारी वहां तैनात कर्मचारियों को नहीं थी. वे सो रहे थे. बराज के गेटों के ऊपर से पानी बहने लगा और जब इसकी आवाज पास के चेकपोस्ट पर तैनात एसएसबी जवानों गजेंद्र कुमार व अजय पाटील ने सुनी, तो दोनों लोग बराज के कार्यालय पहुंचे, तो देखा वहां तैनात कर्मचारी सो रहे हैं. जवानों ने कर्मचारियों को उठा कर जानकारी दी, जिसके बाद से गेट को उठाने का काम शुरू किया गया. इस दौरान गेट नंबर 33 टूट चुका था.
दहशत में हैं इलाके के लोग
गंडक बराज में ज्यादा पानी आने की सूचना जब आसपास के इलाकों में फैली, तो वहां के लोग दहशत में हैं. इधर, यूपी के पड़ोसी जिले महराजगंज से सिंचाई विभाग के अधिकारियों की टीम वाल्मिकीनगर आ रही है. सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि रात के समय में अचानक पानी का दबाव बढ़ गया, जिससे फाटक का संपर्क कंट्रोल रूम से टूट गया. दबाव की वजह से एक फाटक टूट गया है.
रोका गया आवागमन
बराज का फाटक टूटने से उस पर लोगों का आवागमन रोक दिया गया है. लोगों को आनेजाने से रोकने के लिए एसएसबी के जवानों को लगाया गया है. गंडक में पानी अब भी बढ़ा हुआ है. वाल्मिकीनगर में रहनेवाले लोग भी भयभीत है. आवागमन रोके जाने से हजारों लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है, क्योंकि वाल्मिकीनगर व नेपाल के त्रिवेणी की ओर से लोग इसी बराज से होकर आते-जाते हैं.
सोनेवाले कर्मियों पर होगी प्राथमिकी
फाटक टूटने की जांच के लिए भूमि सुधार उपसमाहर्ता जयचंद यादव पहुंचे. उन्होंने कहा कि लापरवाही करनेवाले कर्मचारियों पर प्राथमिकी दर्ज की जायेगी. उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता व बराज एसडीओ को नोटिस जारी किया जा रहा है. साथ ही बराज का जल स्तर बढ़ने की जानकारी देनेवाले दोनों जवानों को सम्मानित करने का फैसला भी लिया गया है. इन जवानों का 15 अगस्त को सम्मान किया जायेगा.
राज्य सरकार ने मांगी रिपोर्ट
गंडक बराज के फाटक टूटने पर राज्य सरकार ने रिपोर्ट मांगी है. डीसीएलआर जयचंद यादव के नेतृत्व में एक जांच टीम का गठन किया गया है. इसमें रजिस्ट्रार कुमार दीनबंधु व सीओ चंद्र शेखर भी शामिल है.
जांच टीम ने वाल्मीकिनगर पहुंच कर गंडक बराज के कर्मियों व अधिकारियों के साथ-साथ अन्य लोगों का बयान दर्ज किया. इसमें एसएसबी के वे जवान भी शामिल हैं, जिन्होंने बराज के कर्मियों को जगाया. बिसहां गांव में घुसा पानी गंडक में पानी बढ़ने का सबसे पहले असर बिसहां गांव पर पड़ा है. दोनों नहरों में पानी बढ़ने से बिसहां गांव के दर्जनों घरों मं पानी घुस गया है. सैकड़ों एकड़ फसल डूब गयी है. प्रभावित लोगों सुरक्षित स्थान की ओर जा रहे हैं. गांव में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बचाव का काम भी शुरू हुआ है.
खतरा पश्चिमी व पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और यूपी के कुशीनगर व महाराजगंज िजलों में बाढ़ का खतरापांच लाख क्यूसेक पानी पहुंचा3.60 हजार क्यूसेक पर खतरे का निशान, सभी 36 फाटक खोले गयेराहत नेपाल के उन इलाकों में शुक्रवार को दिन में बारिश नहीं हुई, जहां बारिश से गंडक में पानी बढ़ा है.
जो दोषी होंगे, उन पर होगी सख्त कार्रवाई
पटना : जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कहा कि वाल्मिकीनगर बराज का न कोई गेट टूटा है और न ही उखड़ा है. हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि नेपाल की बारिश का दबाव अत्यधिक बढ़ने का कारण बराज के एक गेट को मामूली क्षति हुई है.
यह गेट कैसे क्षतिग्रस्त हुआ, इसकी जांच का निर्देश दिया गया है. घटनास्थल पर बाढ़ विशेषज्ञ सेवानिवृत अभियंता केएन लाल को भेजा गया है.
उनके अलावा मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता और यांत्रिक मुख्य अभियंता को भी जांच के लिए भेजा गया है. तीनों अभियंताओं को 24 घंटे में जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है. शुक्रवार को विभागीय सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट में कोई अभियंता-अधिकारी दोषी पाये गये, तो उन पर सख्त कार्रवाई होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी चंपारण के डीएम को भी घटना की जांच के निर्देश दिया गया हैं.
उन्होंने बताया कि स्काडा सिस्टम को प्राइवेट एजेंसी ऑपरेट कर रही है, यदि वह भी दोषी पायी गयी, तो उस पर एफआइआर कर कठोर कार्रवाई की जायेगी. जल संसाधन मंत्री ने कहा कि बिहार की नदियों पर नेपाल का बारिश का प्रभाव पड़ता है. विभाग इसकी सतत निगरानी कर रहा है. अभियंताओं को एक मिनट के लिए भी तटबंध न छोड़ने के सख्त निर्देश दिये गये हैं.
उन्होंने बताया कि बराज के गेट नंबर 33 की मरम्मत के लिए दो मेकैनिकल इंजिनियर भेजे गये हैं. उन्हें 10 दिनों में गेट की मरम्मत का कार्य पूरा कराने काे कहा गया है. उन्होंने बताया कि बराज में पानी छोड़ने के लिए ‘डबल-गेट सिस्टम’ काम कर रहा है. संकट से निबटने के लिए स्टाकलेट-गेट को जीवित कर पानी को डिस्चार्ज किया जायेगा. बराज पर लगे 36 गेटों से 8.50 लाख क्यूसेक पानी डिसचार्ज करने की क्षमता है. आज भी बराज से 1.69 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग के प्रधान सचिव अरुण सहित कई अधिकारी मौजूद थे.

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