स्वास्थ्य निदेशक के जाली पत्र पर सात कर्मियों की तैनाती का मामला
योगदान कराने के तीन माह बाद सीएस ने संपुष्टि का किया था अनुरोध, अब फंसे
बेतिया. स्वास्थ्य निदेशालय के फरजी पत्र पर जिले में तैनाती पाने वाले सात स्वास्थ्य कर्मियों के फरजीवाड़े का मामला तैनाती के तीन बाद खुला है. इसको लेकर स्वास्थ्य निदेशालय से आपत्ति जताई है. निदेशक प्रमुख आजाद हिंद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन को 9 मई को निदेशालय में अभिलेखों के साथ तलब किया है.
स्वास्थ्य निदेशालय इस बात से खफा है कि फरजी कर्मियों के तैनाती के तीन बाद क्यों सीएस की ओर से संपुष्टि के लिए अनुरोध किया गया. बिना संपुष्टि कराये क्यों इन कर्मिर्यों को योगदान कराया गया. लिहाजा स्वास्थ्य निदेशक ने सीएस से जाली पत्रों के आलोक में जारी योगदान पत्र, पदस्थापना का पत्र, फर्जी कर्मियों के प्रतिनियुक्ति का पत्र, उनके खिलाफ यदि एफआईआर हुई है तो उसकी प्रति, एफआईआर नहीं हुई है
तो जिम्मेवार से स्पष्टीकरण का पत्र व सीएस की ओर से इस मामले के क्या कार्रवाई की गयी. इन सभी अभिलेखों के साथ सिविल सर्जन को नौ मई को अपने कार्यालय में बुलाया है.
लिपिक प्रमोद की बढ़ेंगी मुश्किलें : पहले के सीएस डा गोपाल कृष्ण द्वारा निलंबित के बाद फिर बहाली पाने वाले लिपिक प्रमोद कुमार की मुश्किलें बढ़ेंगी. स्वास्थ्य निदेशक ने सीएस से लिपिक प्रमोद के सेवा संबंधित कागजों की मांग की है. सेवा पुस्तिका व नियुक्ति पत्र भी निदेशक ने तलब किया है.
