लो-वोल्टेज बना शहरवासियों के बेचैनी का कारण, दिन तो जैसे-तैसे, रात गुजरती करवटें बदल कर
बेतिया : लगातार तापमान बढ़ रहा है. पारा चढ़ने के साथ गरमी बढ़ गयी है. गरमी बढ़ने के साथ ही बिजली की आंख-मिचौली शुरू हो गयी. दिन हो या रात बिजली घंटों कटी रहती है. अगर बिजली रहती भी है,तो लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है. जिससे लोग पसीने से तर-बतर रहते हैं. रात में तो पसीने से लथपथ होने के साथ करवट बदकर रात की गुजारनी पड़ती है.
बिजली गायब रखने का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ रहा है. लालटेन की रोशनी में अपनी कोर्स पूरा करने को विवश हो गये हैं. बिजली का दीदार होता है,तो वोल्टेज इतनी कम रहती है कि बल्बों के फिलामेंट ही जलते हैं. लो-वोल्टेज के कारण कई बार शहरवासियों को बिजली रहते हुए भी लालटेन या मोमबत्ती जलाना पड़ता है.
इन इलाकों में है बिजली की समस्या: यूं तो शहर के तकरीबन सभी मोहल्ले के लोग बिजली की आंख-मिचौली से जूझ रहे हैं. लेकिन शिक्षक नगर, बंगाली कॉलोनी, आशा नगर, माइकल कॉलोनी, नया बाजार, तीन लालटेन चौक आदि इलाके में बिजली की किल्लत कुछ ज्यादा ही है.
पानी के लिए है त्राहिमाम: बिजली की आंख-मिचौली व लो-वोल्टेज लोगों के जीवन पर सीधा असर डाल रहा है. बिजली नहीं रहने से रात को लोगों की नींद पूरी नहीं हो रही है. इसके साथ हीं पानी की किल्लत भी उनको परेशान किये हुए है. बिजली की कमी से घरों के छतों पर लगे घंटों-घंटे तक खाली रहता है. सुबह में स्कूल जाने वाले छात्रों को स्कूल की तैयारी के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ती है. शौचालय,स्नान, खाना आदि के लिए भी पानी के किल्लत से जूझना पड़ता है. पानी के लिए चापकलों पर महिलाओं की लंबी लाइने देखी जा रही है.
