हरनाटांड़ : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर वन क्षेत्र में वर्ष 2004-05 में आये चक्रवात के दौरान गिरे पेड़ों की नीलामी होने की संभावना है. डीएफओ ने इसमें विस्तृत रिपोर्ट तलब किया है.
अगर वन विभाग के वरीय अधिकारियों की अनुमति मिली तो शीघ्र हीं वन क्षेत्र कार्यालय में स्टोर किये कीमती लकड़ियों की नीलामी हो सकती है. उल्लेखनीय है कि चक्रवात के दौरान गिरे पेड़ों की नीलामी नहीं होने से लाखों रुपये की कीमती लकड़ी नष्ट हो रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2004-05 में आये चक्रवात से वन प्रमंडल दो के मदनपुर वन क्षेत्र के काटी उपखंड में बड़े पैमाने पर कीमती सागवान के पेड़ गिर गये थे. कुछ माह बाद वन विभाग ने सभी पेड़ों की कटाई करा कर सभी लकड़ियों को मदनपुर वन क्षेत्र कार्यालय परिसर में स्टॉक करा दिया. तभी से उक्त लकड़ी विभागीय कार्यालय में सड़ रही है.
इधर, पिछले दिनों विभाग के द्वारा लकड़ी की नीलामी कराने की चर्चा हुई. लेकिन नीलामी नहीं हुई. कई वरीय अधिकारियों ने कार्यालय परिसर में बरबाद हो रही लकड़ियों के बाबत भी जानकारी ली. इस दौरान पाया गया कि वर्ष 2004-05 में आये चक्रवात में सैकड़ों की संख्या में पेड़ गिर गये थे. सभी पेड़ों को काट कर वन परिसर में रखा गया है.
वन प्रमंडल दो के डीएफओ अमित कुमार ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. उन्होंने बताया कि चक्रवात में गिरे पेड़ों की नीलामी के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट विभाग को भेजा गया है. वरीय अधिकारियों के स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद लकड़ियों की नीलामी की जायेगी. विदित हो कि टाइगर रिजर्व से किसी प्रकार के पेड़ काटने पर प्रतिबंध है.
