बेतिया : मुफस्सिल थाना के छौरहरा गांव निवासी जोगेंद्र पाण्डेय का पुत्र सोनू पाण्डेय सड़क दुर्घटना में घायल हो गया. परिजन इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आये. जहां से उसे तुरंत पीएमसीएच पटना के लिए रेफर कर दिया गया.
बताया गया कि सोनू का पैर टूट गया है, इलाज यहां संभव नहीं है. सोनू अकेले नहीं है, जो दुर्घटना में घायल होने के बाद रेफर किये गये हैं. बल्कि हर रोज ऐसे मरीजों को रेफर कर दिया जाता है.
संसाधनों की है कमी
मेडिकल कॉलेज रेफरल अस्पताल बन चुका है. डॉक्टर इसके पीछे अस्पताल में संसाधन की कमी बताते हैं. इनका कहना है कि इलाज के दौरान इसलिए रिस्क नहीं लिया जाता है कि हालत बिगड़ने की स्थिति में बेहतर संसाधन नहीं होने के कारण कुछ अनहोनी हो सकती है.
ये सुविधाएं होना जरूरी
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के दर्जा पाये अस्पतालों में सजर्री, आइसीयू, सीटी स्कैन, लैब आदि सुविधाओं का होना आवश्यक होता है.
डॉ. वीणा की जगह डय़ूटी करती मिलीं बाहरी डॉक्टर
बेतिया. सदर अस्पताल एमजेके की ओपीडी में डय़ूटी करने वाले डॉक्टर खेल कर रहे हैं. खुद डय़ूटी न करना पड़े इसके लिए अपने जगह बाहर से भाड़े के डॉक्टर लगा दिये जाते हैं. जो ओपीडी में आने वाले मरीजों के पुरजे पर दवाइयां लिखते हैं.
शनिवार को प्राचार्य डॉ. राजीव रंजन ने अपने ओपीडी निरीक्षण के दौरान इस खेल को पकड़ा. ओपीडी निरीक्षण के दौरान स्त्री रोग विभाग में मेडिकल कॉलेज डॉ. वीणा कुमारी की डय़ूटी थी. जबकि इनके स्थान पर कोई और महिला डॉक्टर कार्य कर रही थी. प्राचार्य के पूछने पर उस महिला डॉक्टर ने बताया कि वह बीएचएमएस हैं. प्राचार्य ने कड़ी हिदायत देते हुए तुरन्त उन्हें अस्पताल से बाहर किया और कहा कि अगली बार दिखीं तो एफआइआर दर्ज करा देंगे. प्राचार्य ने डॉ. वीणा कुमारी ने स्पष्टीकरण मांगा है.
डॉक्टर करते हैं ये खेल
मेडिकल कॉलेज में अपनी डय़ूटी के जगह बाहरी किसी चिकित्सक को लगा देने का यह खेल नया नहीं है. इससे पूर्व भी ऐसा मामला सामने आ चुका है. खासकर पटना से अप-डाउन करने वाले डॉक्टर यह खेल करते हैं.
