पूर्वी नहर में 3000 क्यूसेक पानी

किसानों को राहत : धान के बिचड़े गिराने में मिलेगी सुविधा बगहा/वाल्मीकिनगर : चिलचिलाती धूप के कारण खेतों में सूख रहे गन्ना के पौधों को देख किसान बेहद मायूस हैं. आर्थिक रूप से संपन्न किसान तो किसी तरह डीजल का प्रबंध कर पंप सेट से गन्ना की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन मध्यमवर्गीय किसानों पर […]

किसानों को राहत : धान के बिचड़े गिराने में मिलेगी सुविधा
बगहा/वाल्मीकिनगर : चिलचिलाती धूप के कारण खेतों में सूख रहे गन्ना के पौधों को देख किसान बेहद मायूस हैं. आर्थिक रूप से संपन्न किसान तो किसी तरह डीजल का प्रबंध कर पंप सेट से गन्ना की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन मध्यमवर्गीय किसानों पर ये गरमी और धूप कहर बन कर टूटा है. दियारा के इलाके में करीब 200 एकड़ भूमि में लगे गन्ना के फसल पूरी तरह से झुलस गये हैं. चूंकि वहां सिंचाई का भी कोई साधन नहीं है.
बोरिंग आदि की व्यवस्था दियारा क्षेत्र में नहीं हो पायी है. नहर से खेतों की सिंचाई करने वाले इलाके के किसान भी टकटकी लगाये हुए हैं. नहर में पानी नहीं है. इस बीच, गुरुवार को गंडक बराज वाल्मीकि नगर से पूर्वी नहर में 3000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया.
किसानों के खेतों में सिंचाई के लिए यह पानी छोड़ी गयी. जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता राम विनय शर्मा ने बताया कि जिला से पानी डिस्चार्ज करने के लिए डिमांड आया था. उसके आलोक में पानी छोड़ दिया गया है. डिमांड आने पर पानी का लोड बढ़ाया जा सकता है. इस प्रकार तिरहुत नहर में पानी आया है. लेकिन अभी भी अंतरराष्ट्रीय दोन नहर एवं त्रिवेणी नहर में पानी डिस्चार्ज नहीं किया
गया है. इसको लेकर किसानों में बेहद आक्रोश है.
तिरहुत नहर में आया पानी
पिछले चार माह से सूखी पड़ी तिरहुत नहर में गुरूवार की दोपहर में पानी आया. तिरहुत नहर सम बगहा दो एवं बगहा एक प्रखंड के अधिकांश खेतों की पटवन होती है. किसानों ने राहत की सांस ली है.
डीजल से पंप सेट चला कर खेतों का पटवन करने वाले किसानों का कहना है कि अब गन्ना भी झुलसने से बच जायेगा और धान का बिचड़ा भी गिर जायेगा.
हालांकि किसानों को मानसून के विलंब से आने की चिंता परेशान कर रही है. जिन किसानों के खेतों की सिंचाई नहर से नहीं होती है. वे बेहद मायूस हैं और इंद्र देवता की ओर टकटकी लगाये हुए हैं.
पानी छूटने में देर
अधिकारियों का मानना है कि त्रिवेणी नहर में अभी पानी छूटने में विलंब हो सकता है. क्योंकि इस नहर में अंग्रेजों के जमाने के पुराने पुल एवं सायफन को तोड़ कर नये सिरे से बनाया जा रहा है. मसलन, त्रिवेणी नहर के 84, 102, 154 आरडी समेत अन्य जगहों पर निर्माण कार्य चल रहा है.
इसलिए पानी छूटने में विलंब हो सकता है. हालांकि वरीय अधिकारियों ने आदेश दिया है कि निर्माण कार्य तेजी के साथ पूरा किया जाये . ताकि किसानों के खेत में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाये. स्थानीय अधिकारियों ने भी निर्माण कंपनी पर शीघ्र कार्य पूरा करने के लिए दबाव बनाया है.

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