स्वास्थ्य सेवा बेदम : सरकारी अस्पताल के नहीं चलते पंखे, चादर लेकर आते मरीज
बेतिया :घड़ी में मंगलवार के 11 बज रहे थे. एमजेके सदर अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ जमा थी. पर्चियां कट रही थीं. मौजूद डॉक्टर परामर्श के साथ दवा भी लिख रहे थे, लेकिन दवा बाहर से खरीदना पड़ रहा था. अब 11.30 बज चुका था,अस्पताल के बर्न वार्ड में भरती मरीजों में से ज्यादा गरमी की वजह से बेचैन थे.
पंखा भी नहीं चल रहा था. मरीज अपने घर से ही बिछावन, चादर, मच्छरदानी लेकर पहुंचे थे. 12.15 बजे तक भरती मरीजों को भोजन नहीं मिल सका था. मरीजों से ज्यादा वार्ड में तीमारदार (मरीज के परिजन) दिखे. साढ़े 12 बजे तक कोई भी डॉक्टर राउंड पर नहीं पहुंच सके थे. कुछ ऐसा ही अनुमंडलीय अस्पताल नरकटियागंज व प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी नजारा रहा.
नहीं खरीदी गयीं दवाएं, 59 लाख सरेंडर
अस्पताल में 90 फीसदी दवाएं खत्म हो चुकी हैं. लिहाजा भरती मरीजों के लिए ज्यादातर दवाएं बाहर से खरीदना मजबूरी बन गयी है. पता चला कि अस्पताल में बीते वर्ष दवा खरीद के लिये 59 लाख रुपये मिला था. जिला स्तर पर टेंडर होना था. नहीं हो सका. लिहाजा दवा मद का 59 लाख रुपये 31 मार्च को सरेंडर(वापस) हो गया.
कहते हैं सिविल सर्जन
पूरे बिहार में दवा की किल्लत है. टेंडर किया जा रहा है. जल्द ही दवा की उपलब्धता हो जायेगी. यदि डॉक्टर गैरहाजिर है तो इसपर कार्रवाई होगी. छह माह से एंटी रैबीज भी कही नहीं है. उच्चधिकारियों को अवगत करा दिया गया है.
डा. गोपाल कृष्ण, सिविल सजर्न
