बगहा : पान, गुटखा, तंबाकू चबाने की आदत एवं गलत लाइफ स्टाइल की वजह से जिले के शहरी एवं ग्रामीण इलाके की 40 फीसदी आबादी दांतों की किसी न किसी बीमारी से जूझ रही है.
इसके शिकार सिर्फ शहर में हीं नहीं गांव में भी हैं. हालांकि गांव में इसके शिकार 18 से 60 आयु वर्ग के लोग हैं. यदा कदा गरीबों की बस्ती में बच्चे भी गुटखा का सेवन करते देखे गये हैं. जबकि गांव एवं शहर के सभी शैक्षिक संस्थानों पर तंबाकू मुक्त परिसर घोषित करने से संबंधित स्लोगA लिखा हुआ है. स्कूलों के शिक्षक और शिक्षा समिति के लोग तंबाकू मुक्त विद्यालय परिसर बनाने के अभियान में काफी मुस्तैदी के साथ जुटे थे.
इस मद में प्रत्येक विद्यालय को 700 से 500 रूपये तक की राशि भी आवंटित की गयी थी. उल्लेखनीय है कि सीनर्जी वेलफेयर ट्रस्ट नामक एक स्वयंसेवी संस्था ने जिले में सर्वे कर खुलासा हुआ है कि पान , गुटखा और तंबाकू चबाने के कारण अधिकांश लोग दंत रोग के मरीज हैं. ये लोग दांतों की उचित साफ – सफाई भी नहीं करते है. ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश महिलाएं भी दंत रोग की मरीज हैं.
संक्रमण से दिल को खतरा
मसूढ़ों की सामान्य-सी लगने वाली परेशानी खतरनाक हो सकती है. यह दिल को नुकसान पहुंचा सकती है. डा अनवर के मुताबिक मसूढ़ों में सूजन आना, उनसे खून आना गम डिजीज के लक्षण हैं.
गम डिजीज न सिर्फ आपके दांत और मसूढ़ों तक सीमित रहती हैं, बल्कि इससे आपको दिल की बीमारी, डायबिटीज, मुंह का कैंसर भी हो सकता है. मसूढ़ों से आने वाला खून संक्रमण आपके दिल तक पहुंच आपके दिल को भी खतरा पहुंचा सकता है.
फिलिंग क्यों जरूरी
गुटखा और तंबाकू चबाने के बाद 95 फीसदी मामलों में मसूड़ों और दांतों की ढंग से सफाई न होने और उनमें सड़न व बीमारी होने पर मुंह से बदबू आती है. कुछ मामलों में पेट खराब होना या मुंह की लार का गाढ़ा होना भी इसकी वजह होती है. प्याज और लहसुन आदि खाने से भी मुंह से बदबू आने लगती है. ऐसी स्थिति में लौंग, इलायची चबाने से इससे छुटकारा मिल जाता है.
खूबसूरती ही नहीं, दांत से जुड़ी है जिंदगी भी
एक्सपर्ट का मानना है कि दांतों का रिश्ता सिर्फ खूबसूरती से नहीं होता , बल्कि इनके बिना जिंदगी बेहद मुश्किल हो जाती है. दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोग दांतों की देखभाल को लेकर गंभीर नहीं होते.
अगर शुरू से ध्यान दिया जाये तो दांतों की बहुत सारी समस्याओं से बचा जा सकता है. अपोलो डेंटल हॉस्पिटल के वरीय चिकित्सक डा. तारिक अनवर का कहना है कि दांत की बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता के अभाव हैं. जबकि सिर्फ दांतों की साफ-सफाई का ध्यान रखकर ही अधिकतर बीमारियों को दूर किया जा सकता है.
वैसे, मसूड़ों और दांतों में दिक्कत बचपन से ही शुरू होती हैं. इसका प्रमुख कारण बच्चों को फास्ट फूड खिलाना है. दांत से जुड़ी दिक्कतों की रोकथाम के लिए स्कूलों में भी बच्चों को जागरूक किया जाना चाहिए. साथ ही उन्हें नियमित रूप से दांतों की सफाई करने के टास्क मिलने चाहिए. उनका कहना है कि मुंह की दिक्कतों का सीधा असर शरीर के बाकी हिस्सों पर पड़ता है. दांतों की सही देखभाल न करने से हार्ट अटैक और मुंह के कैंसर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं. ऐसे में दांतों की छोटी-छोटी समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
