लोगों को मिली राहत : जमा पानी का गंडक नदी में धीरे-धीरे हो रहा रिसाव
वाल्मीकिनगर (बगहा). नेपाल के म्यागदी जिले में बेनी बाजार रामछे गांव के समीप काली गंडक नदी में पहाड़ टूट कर गिरने के कारण डंप किये पानी से अब को कोई खतरा नहीं है. 3.5 लाख वर्ग फीट एरिया में स्टोर पानी का रिसाव धीरे – धीरे गंडक नदी की ओर हो रहा है.
नेपाल के नवल परासी जिला के क्षेत्र संख्या 6 के सांसद देवकरण कलवार उर्फ संटू ने बताया कि काली गंडक नदी से मलवा भारत में यह पानी तबाही नहीं मचाये , इस लिए मलवा को धीरे – धीरे हटाया जा रहा है. खतरा पूरी तरह से टल गया है. नेपाली सेना और पुलिस वहां मुस्तैद है. उन्होंने भारतीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों से अपील किया है कि डर की कोई बात नहीं है. डंप किये पानी को कई हिस्सों में बांट कर गंडक नदी में छोड़ा जा रहा है. वहीं वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सहायक अभियंता मो. जिलानी ने बताया कि सोमवार की 12 बजे रात में काली गंडक नदी में डंप किये पानी का पहला फ्लो (पानी का बहाव)वाल्मीकिनगर गंडक बराज के समीप पहुंचा. उस वक्त 17 हजार क्यूसेक पानी बराज से डिस्चार्ज किया गया. काली गंडक नदी में दो दिनों से डंप किये पानी के साथ मलवा भी आ रहा है.
नेपाल के पानी से भारत में जल प्रलय को रोकने के लिए नेपाल प्रशासन के प्रयास की यहां के अधिकारियों ने सराहना की है. जानकार बताते हैं कि डंप किये पानी को अगर नेपाल प्रशासन की ओर से एक बार छोड़ दिया गया होता तो निश्चित रूप से यहां मई की गरमी में जल प्रलय की स्थिति होती.
जनजीवन हुआ सामान्य
जल प्रलय की अफवाह से गंडक नदी के तटबंध पर बसे गांव के लोग काफी भयभीत थे. सोमवार को इन गांवों में जनजीवन पूरी तरह से सामान्य हो गया. दो दिनों से खेती बारी और रोजी रोजगार छोड़ कर बाढ़ के संभावित खतरा से डरे सहमे लोग अपने घर पर हीं परिवार के साथ थे.
कुछेक परिवार तो अपने नाते – रिश्तेदारों के यहां चले गये थे, वे सभी मंगलवार को अपने – अपने घर लौट आये. वाल्मीकिनगर के झंडूटोला गांव के मनोज प्रसाद ने बताया कि बाढ़ आने की सूचना से लोग काफी डर गये थे. घरों का समान बांध कर आपदा की स्थिति में यहां से भागने की तैयारी में थे.
खतरा टलने के बाद पहुंचा एंबुलेंस
जल प्रलय को लेकर अलर्ट जारी होने के तीन दिनों बाद स्वास्थ्य महकमे की ओर से प्राथमिक उपचार करने वाला एंबुलेंस मंगलवार को वाल्मीकिनगर पहुंचा.
अनुमंडलीय अस्पताल बगहा की ओर से यह एंबुलेंस वाल्मीकिनगर भेजा गया है . एंबुलेंस अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य वाल्मीकिनगर में खड़ा है. एंबुलेंस के प्रभारी डा गोविंद चंद्र शुक्ला ने बताया कि यह एंबुलेंस प्राकृतिक आपदा से निबटने के लिए आया है. लेकिन आपदा की स्थिति खत्म होने के बाद एंबुलेंस पहुंचने के बावत पूछने पर वे चुप्पी साध लेते हैं. उनका कहना है कि एंबुलेंस में वे सारी सुविधाएं मौजूद है. जिसके जरिये प्राथमिक उपचार बेहतर ढंग से किया जा सकता है.
वाल्मीकिनगर पहुंचा गंदा पानी
आमतौर पर बरसात के दिनों में गाद युक्त (गंदा) पानी गंडक नदी में आता है. लेकिन सोमवार की रात से पूरी तरह से बरसाती पान के शक्ल का पानी आ रहा है. इस वजह से बराज के अधिकारियों का मानना है कि काली गंडक नदी में डंप किया हुआ पानी वाल्मीकिनगर पहुंच गया है. बराज के तकनीशियन बताते हैं कि गंदा पानी काली गंडक नदी का हीं है. उल्लेखनीय है कि 23 मई की रात में नेपाल के काली गंडक नदी में भूस्खलन के कारण पहाड़ टूट कर गिर गया था. इसको लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया था.
दियारा में लौटने लगे किसान
पिपरासी/मधुबनी. नेपाल में पहाड़ टूटने के कारण आने वाले जल प्रलय की खबर के बाद से पलायन कर रहे किसान मंगलवार की शाम में अपने घरों की ओर लौटने लगे. मधुबनी प्रखंड के चिउरही पंचायत के रेवहीया किसान कोशिल यादव ने बताया कि बेवजह परेशान हुए. घर बार छोड़ कर यूपी में एक रात बिताना पड़ा. पता चला है कि बाढ़ की स्थिति टल गयी तो फिर लौट आये है. किसान केदार यादव का कहना है कि ईश्वर की कृपा से इस तबाही से बचे हैं.
एसएबी के जवानों ने खोला बेडिंग
भारत – नेपाल सीमा पर कई बीओपी गंडक नदी के तट पर अवस्थित हैं. बाढ़ की खतरा को लेकर सीमा पर अवस्थित चकदहवा , झंडू टोला व वाल्मीकिनगर बीओपी के एसएसबी के जवानों को अलर्ट किया गया था. वे बेडिंग बांध कर तैयार थे. बाढ़ आते हीं वे वहां से पलायन कर जाते. मंगलवार को बाढ़ का खतरा टलने की सूचना मिलने के बाद एसएसबी के जवानों ने अपना-अपना बेडिंग खोला. 48 घंटे से पूरी तरह अलर्ट रहे जवानों ने भी राहत की सांस ली.
सांसद बोले, थैंक्स नेपाल
नेपाल के काली गंडक नदी में भूस्खलन की वजह से बिहार में बाढ़ की खतरा को टालने में नेपाल प्रशासन की ओस से किये गये सहयोग की सराहना वाल्मीकिनगर के सांसद सतीश चंद्र दूबे ने की है.
उनका कहना है कि भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से नेपाली से भारत का रिश्ता मजबूत हुआ है. इसी का परिणाम है बीतें दिनों नेपाल में आये भूकंप में भारत ने वहां के लोगों को मानवता के आधार पर व्यापक सहयोग किया. विगत 23 मई को पहाड़ टूट कर गिरा. उससे भारत में तबाही आ सकती थी. लेकिन नेपाली सरकार ने सराहनीय काम किया है. पानी को धीरे – धीरे छोड़ कर बाढ़ की तबाही से बचाया है. इसके लिए नेपाल को थैंक्स. उल्लेखनीय है कि बीतें वर्षो में नेपाल के पानी से भारत में तबाही की कई कहानी लिखी जा चुकी है. संभवत: उस वक्त नेपाली सरकार का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता था.
लेकिन इस बार नेपाल ने भी दोनों देश के रिश्ते को मजबूत करने के लिए बेहद सराहनीय कार्य किया है. भले हीं पानी डंप करने की वजह से नेपाली क्षेत्र में थोड़ी तबाही आयी. लेकिन इंडिया को सेफ करने के लिए वहां की सेना और पुलिस के जवानों ने कठिन परिश्रम किया.
