आओ बच्चों, गरमी की छुट्टी में वाल्मीकि आश्रम चलते हैं

गरमी की छुट्टी हो गयी है. बच्चे हिल स्टेशन की ओर इंज्वाय करने जाने की जिद्द कर रहे हैं. भीषण गरमी का मौसम है. आरक्षण टिकट के लिए मारा मारी है. महंगाई के कारण बजट भी कमजोर पड़ रहा है. फिर भी बच्चों के बालमन को दुखी होने नहीं देना चाहते तो आइए हम आपकी […]

गरमी की छुट्टी हो गयी है. बच्चे हिल स्टेशन की ओर इंज्वाय करने जाने की जिद्द कर रहे हैं. भीषण गरमी का मौसम है. आरक्षण टिकट के लिए मारा मारी है. महंगाई के कारण बजट भी कमजोर पड़ रहा है.
फिर भी बच्चों के बालमन को दुखी होने नहीं देना चाहते तो आइए हम आपकी मुश्किल आसान कर देते हैं. एक बार गरमी की छुट्टी बच्चों के साथ वाल्मीकिनगर में इंज्वाय कर देखिए. यहां का मौसम कुल्लू मनाली से कुछ कम नहीं है. फर्क सिर्फ इतना , यहां भौतिकवादी और पश्चात्य संस्कृति नहीं है, जो भी दिखेगा वह प्रकृति का वरदान होगा.
बगहा: भूकंप की वजह से इस वर्ष गरमी की छुट्टी पहले हो गयी. बार- बार धरती हिलने के कारण सारा मजा भी किरकिरा हो गया. बच्चे गरमी की छुट्टी में धमाल मचाने की तैयारी किये थे.
लेकिन सब भूकंप ने गड़बड़ा दिया. हालांकि अब धीरे -धीरे भूकंप का दहशत कम हो रहा है. बच्चे धरती डोलने के दहशत से उबर रहे है तो उन्हें गरमी की छुट्टी में किये गये प्लान की याद आ रही है. वे अपने अभिभावकों को सैर सपाटा प्लानिंग की याद दिलाने लगे है. हाल के दिनों में अचानक ट्रेनों में बढ़ी भीड़ को देख कर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चे गरमी की छुट्टी इंज्वाय करने के लिए निकल पड़े हैं. अलबत्ता,
सभी अभिभावक अपने बच्चों को गरमी की छुट्टी बिताने के लिए हिल स्टेशन पर ले जाने में सक्षम भी नहीं होते. उनके लिए तो वाल्मीकिनगर हिल स्टेशन से कम नहीं हैं.
पापा! आधी छुट्टी बीत गयी.
स्कूल न जाने की आजादी और दिल खोलकर मस्ती करने का वक्त आया गया है. बच्चों के लिए तो यह गर्मी छुट्टी बोनैंजा की तरह आती हैं. छुट्टियों में बच्चों का टाइम मैनेजमेंट ऐसा हो कि वे भरपूर आनंद लें. नई चीजें सीख सकें और अभिभावक व बच्चों के बीच मजबूत रिश्ता भी कायम हो सके. यूं कहें कि साल भर पढ़ाई के बोझ से दबे बच्चों को ठंडी हवा के झोके-सा अहसास कराती हैं गर्मी की छुट्टियां. न जल्दी उठने का झंझट, न भारी बैग लादकर स्कूल जाने की टेंशन और न ही ढेर सारी पढ़ाई का बोझ. ऐसे में बच्चें तरह – तरह की प्लानिंग करते हैं. घर से दूर जाकर आनंद मनाने की.
खर्चे कम आनंद ज्यादा
भारत -नेपाल सीमा पर अवस्थित वाल्मीकिनगर का सफर एक दिन का है. यहां कई सारे पौराणिक एवं धार्मिक स्थल हैं, जिन्हें देख कर बच्चों का मन प्रफुल्लित हो जायेगा. लेकिन ध्यान रहे एक दिन के इस सफर को पूरा करने के लिए खाने- पीने का समान घर से हीं लेकर आयें तो अच्छा होगा. क्योंकि भले हीं सरकारी स्तर पर इसे इको टूरिज्म घोषित कर दिया गया है.
लेकिन चाय- नाश्ता , भोजन आदि की बेहतर व्यवस्था नहीं है. वाल्मीकि होटल बिहार है जरूर , लेकिन वहां की व्यवस्था ठीक नहीं है. पहले इस होटल को वन विभाग की ओर से ठेके पर देकर चलवाया जाता है. तब यहां खाने – पीने के समान इतने महंगे थे कि औसत दज्रे का आदमी उस होटल की ओर नजर भी नहीं डालता था. फिलवक्त इस होटल को पर्यटन विभाग ने अपने जिम्मे में ले लिया है तो यहां अब कुछ भी व्यवस्था नहीं है.
बच्चों को दिखायें टूरिस्ट हट
जंगल के बीच में पयर्टकों के लिए टूरिस्ट हट बने हैं. जंगल में एक छोटा सा कमरा बच्चे देखेंगे तो उनका मन प्रफुल्लित होगा. अलबत्ता इन टूरिस्ट हट का किराया भी बाहरी पर्यटकों को नजर में रख कर हीं वन विभाग ने निर्धारित किया है. इस लिए आप का सफर तो एक दिन का है.
रात अपने घर गुजारे तो बेहतर. चूंकि इन टूरिस्ट हटों का छत करकट का बना है. दो वर्ष पूर्व उद्घाटन हुआ था तो छप्पर पर रंग – बिरंग के घास डाले गये थे. वे अब सड़ गये हैं. इस गरमीमें करकट पूरा गरम हो जायेगा. बच्चे वहां रात नहीं गुजार सकते.
वाल्मीकि आश्रम जरूर जायें
भारत – नेपाल सीमा पर अवस्थित है वाल्मीकि आश्रम. बच्चों को इस धार्मिक स्थल का दीदार अवश्य करा दें.
वहां पंडित श्री शेखर सुबेदी जी से जरूर बच्चों को मिलायें. वे विस्तार से जानकारी देंगे. लव – कुश जन्म स्थली, अमर बेल आदि देख कर बच्चों का मन -मिजाज मुग्ध हो जायेगा. इसके इतर नरदेवी मंदिर, जटाशंकर, काली मंदिर आदि का भी भ्रमण बच्चों को अवश्य करायें. त्रिवेणी संगम , गंडक बराज पुल. यहां सीमा पर तैनात एसएसबी के जवान और उनकी कर्त्तव्य निष्ठा बच्चों के लिए अनुकरणीय होगी.
इन जगहों पर जरूर जायें
बच्चों के संग वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल की ठंडी प्राकृतिक हवा , महर्षि वाल्मीकि आश्रम,गंडक बराज, मदनपुर देवी स्थान, भिखनाठोरी,सोफवा मंदिर, चानकी गढ, लौरिया का बोद्ध स्तूप,भितिहरवा गांधी आश्रम, सुभाद्रा स्थान, सरैयामन आदि रमणिक स्थानों का सैर कर आयें.

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