पिपरासी/मधुबनी : नेपाल में पहाड़ टूटने के कारण जल प्रलय की खबर का गंडक दियारा के इलाके में व्यापक असर है. सोमवार को दियारा में घर बना कर रह रहे लोग अपने घरों को छोड़ पलायन करने लगे.
अहले सुबह से टायरगाड़ी पर सामान व बच्चों को लेकर गंडक दियारा को खाली कर दिया. पिपरासी प्रखंड के सेमरालबेदहा पंचायत के श्रीपतनगर, भैसहीया, काटी टोला व बलुआ ठोरी पंचायत के मदरहवा, ठोरी, बउक बैठा का बथान टोला आदि गांवों के लोग पलायन कर गये हैं.
वहीं, मधुबनी प्रखंड की चिउरही पंचायत के रेवहीया, उरदही, मंझार भडरहवा, नैनहा, चिउरही व सिसही पंचायत के काटी टोला, तिवारी टोला, बिरता, महुअवा, सोहगी बरवा व सिसही गांव के लोग दियारा से अपना सामान समेट रहे हैं.
ग्रामीण कोशिल यादव, केदार यादव, सुदर्शन यादव, वसंत मल्लाह, मदन यादव, पतरू सहनी, सरफुद्दीन अंसारी आदि ने बताया कि रात भर जग कर गुजारे. अहले सुबह से दियारा खाली करने में लगे हैं. ये लोग हर साल मानसून आने के बाद पलायन करते हैं. लेकिन, बाढ़ की अफवाह के कारण अभी मई के महीने में ही घर खाली करने को मजबूर हो गये हैं.
उत्तर प्रदेश से आयी टीम
वाल्मीकि नगर : संभावित जल प्रलय की जानकारी लेने के लिए सोमवार दोपहर उत्तरप्रदेश से अधिकारियों की टीम वाल्मीकिनगर पहुंची. गंडक बराज के कंट्रोल रूम में बिहार के अधिकारियों के साथ बैठक हुई.
अधिकारियों ने देर रात में आने वाले पानी के बारे में जानकारी ली. यूपी महाराजगंज के सिंचाई विभाग के अभियंताओं की टीम ने गंडक बराज से पानी डिस्चार्ज किये जाने की व्यवस्था को देखा. उसके बाद तैयारी को लेकर पूरी तरह से संतुष्टि व्यक्त की.
महराजगंज के सहायक अभियंता आरके पांडेय ने बताया कि अब तक मिली सूचना के आधार पर बाढ़ की संभावना नहीं है. पानी की रफ्तार रुक – रुक कर आने वाली है. इस वजह से खतरा की संभावना नहीं है. उनके साथ आये अभियंताओं की टीम में एसके सिंह, ज्ञान शंकर , सुनील कुमार शाही, केएन पांडेय, करूणाकर तिवारी, शीर्ष पर्यवेक्षक देवेंद्र पांडेय आदि शामिल थे.
24 घंटे से खुले हैं बराज के 36 फाटक
संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर पिछले 24 घंटे से गंडक बराज के 36 फाटक खुले हुए हैं. बराज के समीप से सभी पानी को पहले ही डिस्चार्ज किया गया है. ताकि काली गंडक नदी से आये प्रवाह को अधिक देर तक रोकना नहीं पड़े. या फिर अधिक पानी आने पर स्टोरेज की समस्या उत्पन्न नहीं हो.
