बगहा : बिहार में नये नर्सिग होम एक्ट के विरोध में आइआइएम (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की ओर से रविवार को सभी प्राइवेट क्लिनिक बंद रहे. आइआइएम के साथ बिहार सेवा संघ दंत चिकित्सक संघ ने भी समर्थन दिया. डा. रुद्र नारायण पांडेय ने बिहार में लाये गये इस एक्ट को जनविरोधी बताया है.
कई ऐसी शर्ते है जिससे क्लिनिक या अस्पताल को चलाना संभव नहीं हो सकता. बिहार में जहां बिजली की घोर कमी है, वहां सेंट्रल एयर कंडिशन लगाना कहां संभव है.
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की भरती आज तक पूरी नहीं की जा सकी. वहीं एक छोटे नर्सिग होम के लिए ओटी टेक्नीशियन और पारा मेडिकल स्टाफ रखना कहां संभव है. एक एकल छोटे क्लिनिक को शुरू करने के लिए कम से कम 26 विभिन्न विभागों का अनापत्ति प्रमाण पत्र या निबंधन प्रमाण तथा लगभग 25 प्रकार के रिपोर्ट एक निर्धारित अवधि में सरकार को भेजने की बाध्यता है.
जहां नगरपालिका की बदहाली, सड़कों पर फैले कचरे को दूर करने में रही असफल सरकार नर्सिग होम से पर्यावरण का क्लियरेंस मांग रही है. वहीं 24 घंटे आपातकालीन सेवा देने की बाध्यता भी रख रही है. अपोलो दंत चिकित्सालय के डा. तारिक अनवर ने कहा कि सरकार के नये शर्त के विरोध में अस्पताल बंद रखा गया है.
वाल्मीकिनगर. नये नर्सिग होम एक्ट के विरोध में सभी चिकित्सकों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के समर्थन में रविवार को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल के तहत अपना क्लिनिक बंद रखा. जिस कारण दूर- दराज क्षेत्रों तथा गंभीर रुप से अस्वस्थ लोगों में काफी व्याकुलता दिखी.
लोग मरीजों को लेकर इधर से उधर भागते दिखे. हरनाटांड़ क्षेत्र के प्रसिद्ध चिकित्सक डा. कृष्ण मोहन राय, डा. राजेंद्र काजी, डा. प्रेम नारायण प्रसाद तथा वाल्मीकिनगर चिकित्सक डा. राजू प्रसाद ने अपने क्लिनिक के बाहर बंदी का बोर्ड लगा कर बंद रखा.
