पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बर्फबारी ने बढ़ायी कनकनी, दुबके लोग

बेतिया : ध्रुवीय प्रदेशों में हवा का बहाव काफी तेज हो गया है. इसके प्रभाव से पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी हो रही है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का इलाका इसकी चपेट में है. इसके प्रभाव ने एक बार फिर उत्तर बिहार के मौसम के मिजाज को बदल कर रख दिया है. पिछले तीन […]

बेतिया : ध्रुवीय प्रदेशों में हवा का बहाव काफी तेज हो गया है. इसके प्रभाव से पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी हो रही है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का इलाका इसकी चपेट में है. इसके प्रभाव ने एक बार फिर उत्तर बिहार के मौसम के मिजाज को बदल कर रख दिया है. पिछले तीन दिनों तक 3.8 किलो मीटर की औसत रफ्तार से चली पछुआ हवा ने रही सही कसर पूरी कर दी.
घने कुहासे दिन में बादल कर रूप धर रहे हैं. इससे तापामान बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. अधिकतम तापमान जहां सामान्य से करीब 3 डिग्री नीचे खिसक गया है. वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य से करीब 1 डिग्री सेल्सियस ऊपर चढ़ा हुआ है. खिलती धूप के बावजूद मौसम ने करवट ले ली और पूरे वातावरण में कनकनी घुल गयी.
पिछले 48 घंटे से एक बार फिर वातावरण को कुहासे ने अपनी चादर में लपेट लिया है. इसके प्रभाव से सोमवार को दिन में करीब 12 बजे के बाद ही सूरज के दर्शन हुए. सर्द हवा के साथ वातावरण में छाये कुहासे ने लोगों की दिनचर्या को खासे प्रभावित कर दिया. लोगों की दिनचर्या बुरी तरह से प्रभावित हुए.
बच्चों को स्कूल जाने में ठंड के कारण ठिठुरते देखा गया. काम-काजी लोग भी बड़ी मुश्किल से ही घर से बाहर निकले. ठंड व कुहासे के कारण वीरान सड़कों पर उन्हें देर तक ऑटो का इंतजार करना पड़ा. इसके कारण कई लोग दफ्तर में लेट हो गये. वैसे धूप खिलने के बाद मौसम ने थोड़ी राहत दी. लेकिन शाम ढलते हुए सर्द हवाओं ने लोगों को फिर से दुबक जाने को मजबूर कर दिया है. लोग कंबल व रजाई में जाकर शरण ली तो कुछ लोगों ने अलाव के सहारे ठंड को कम करने का प्रयास देर रात तक करते रहे. मौसम के जारी मिजाज को देख कर अभी कनकनी भरी ठंड के बरकरार रहने की संभावना बन रही है. ज्ञात हो कि दिसंबर के तीसरे सप्ताह में अधिकतम 23.7 व न्यूनतम 8.7 डिग्री सेल्सियस तापमान सामान्य माना जाता है.
हवा ने बदला रुख
कनकनी भरी ठंड के जिम्मेवार पछुआ हवा शांत हो गयी है. सोमवार की सुबह से हवा का रुख बदल कर पुरवा हो गया है. इसकी औसत रफ्तार 3 से 6 किलो मीटर प्रति घंटे की दर्ज की गयी है. इससे कुहासे और घने हो सकते हैं. लेकिन वातावरण के तापमान में थोड़ा परिवर्तन हो सकता है. मौसम विभाग का मानना है कि हवा का रुख बदल जाने के बाद भी उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों में कनकनी का दौर जारी रहेगा. इसका कारण कुहासा है. इसका घनत्व सुबह में 100 मीटर से कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है.
चौराहे पर नहीं दिखे सरकारी अलाव
मौसम के बदले मिजाज के बाद भी किसी भी चौक चौराहों पर सरकारी अलाव नजर नहीं आ रहे हैं. लोग अपनी व्यवस्था कर जगह जगह अलाव जला रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में तो इसको लेकर कोई विशेष परेशानी नहीं दिख रही है. लेकिन शहरी क्षेत्र में लोगों को आग जलाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. आम तौर पर लोग कचरों और घर या दुकानों से फेंके जा रहे कागज और डब्बों को जला कर ठंड से जंग करने में जुट जाते हैं. कई स्थानों पर लोग टायर जला कर वातावरण में गरमाहट लाने की कोशिश कर रहे हैं.

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