बेतिया : लोस चुनाव में पश्चिम चंपारण लोस की जारी परिणाम के आये आंकड़ों पर अब समीक्षा शुरू हो गई है. महागठबंधन अपने हार की वजहों को तलाशने में जुटी है तो एनडीए के नेता हार-जीत के अंतरों पर विश्लेषण करने लगे हैं. हालांकि विधानसभावार आये परिणामों पर नजर डाले तो कुछ आंकड़े चौकाने वाले हैं. वैसे तो भाजपा सभी विधानसभाओं में आगे है, लेकिन जिस चनपटिया विधानसभा से बीते 2014 के लोस चुनाव में डॉ. संजय जायसवाल हार गये थे.
इस बार उसी चनपटिया से इन्हे दोगुनी बढ़त मिली है. यह दोगुनी बढ़त महज चनपटिया नहीं बल्कि नरकटिया विधानसभा को को छोड़ तकरीबन हर विधानसभाओं में हैं. ऐसे में जातीय समीकरण बैठाकर परिणाम का इंतजार कर रहे लोगों को कड़ा झटका लगा है. जारी परिणामों में तकरीबन हर जगह से यह जातीय समीकरण टूटता दिख रहा है. सबका साथ सबका विकास के नीती की जीत कहे या राष्ट्रवाद का जोर कहे या फिर ध्रुवीकरण पूरा परिणाम भाजपा के पक्ष में है.
बता दें कि प. चंपारण लोस के छह विधानसभाओं में चार पर एनडीए के विधायक हैं तो नरकटिया राजद व बेतिया कांग्रेस के कब्जे में है. इसके बाद भी इन दोनों विधानसभाओं में भाजपा आगे हैं. हालांकि नरकटिया में हार-जीत का अंतर थोड़ा कम है, लेकिन बेतिया में यह आंकड़ा कहीं अधिक है.
