बेतिया : जिले में आग लगने की घटनाएं अब परवान पर हैं. अमूमन हर रोज अगलगी के मामले सामने आ रहे हैं. अभी तक तो आग ने रिहायशी इलाकों के मकानों को अपने आगोश में लिया है, लेकिन अब खेतों में लहलहा रही गेहूं की तैयार फसलों पर आग लगने का खतरा काफी बढ़ गया है. बावजूद इसके प्रशासन ऐसे हादसों से निबटने के लिए अभी तक तैयार नहीं दिख रहा है. यहां तक की आगलगी से बचाव के कोई भी प्लान नहीं बनाये जा सके हैं. आग लगने के सीजन आने के बाद भी कोई सक्रियता नहीं दिख रही है.
खुद भी रहें सतर्क, फायर ब्रिगेड के भरोसे नहीं बुझेगी आग
बेतिया : जिले में आग लगने की घटनाएं अब परवान पर हैं. अमूमन हर रोज अगलगी के मामले सामने आ रहे हैं. अभी तक तो आग ने रिहायशी इलाकों के मकानों को अपने आगोश में लिया है, लेकिन अब खेतों में लहलहा रही गेहूं की तैयार फसलों पर आग लगने का खतरा काफी बढ़ गया […]

हालात यह है कि ग्रामीण इलाकों में आग से बचाव के लिए चनपटिया, नौतन, बैरिया व गोपालपुर थानों को एक-एक गाड़ियां तो दे दी गयी हैं, लेकिन अभी तक न तो उस पर प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती नहीं की जा सकी है. यह हाल तब है, जब सरकारी रिकाॅर्ड के मुताबिक इस साल अब 28 जगहों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं.
इधर, मौसम में तल्खी तेज होती जा रही है. धूप बढ़ता जा रहा है और पछुआ हवाओं की रफ्तार भी गति पकड़ती जा रही है. ऐसे में शहर से लेकर गांव तक के कई इलाके हादसों के मुहाने पर हैं. शहरों में ट्रांसफार्मरों के नीचे सजी दुकानें तो गांवों में खेतों से होकर गुजरी जर्जर बिजली तारें लहलहा रही गेंहू की फसलों को राख करने के लिए मुंह बाये खड़ी हैं. ऐसे में सतर्कता बेहद जरूरी है. आपदा होने के चलते आगलगी की इन घटनाओं को रोका तो नहीं जा सकता है, लेकिन सतर्कता की वजह से नुकसान को काफी कम किया जा सकता है.