बिहार में कैसे सुधरे महिलाओं की स्थिति विषय पर परिचर्चा में वक्ताओं ने रखे अपने विचार

बेतिया : बिहार को यह गौरव हासिल है कि त्रिस्तरीय पंचायती राज महिलाओं को आरक्षण देकर घर से बाहर निकालने का कार्य सरकार ने किया और आज महिलाएं पंचायती राज में बढ़ चढ़कर भाग भी ले रही है. लेकिन आज भी यहां की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और अभी भी इनमें शिक्षा दर और तकनीकी […]

बेतिया : बिहार को यह गौरव हासिल है कि त्रिस्तरीय पंचायती राज महिलाओं को आरक्षण देकर घर से बाहर निकालने का कार्य सरकार ने किया और आज महिलाएं पंचायती राज में बढ़ चढ़कर भाग भी ले रही है. लेकिन आज भी यहां की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और अभी भी इनमें शिक्षा दर और तकनीकी शिक्षा समेत न्याय और अवसर में बहुत सी असमानताएं मौजूद हैं.

इसको दूर किये बिना बिहार के विकास की बातें नहीं की जा सकती हैं. सभी जानते हैं कि प्रत्येक नारी में घर संचालन के तमाम गुण मौजूद होती है और वे जन्मजात शिल्पकार, अभियंता, चिकित्सक, शिक्षिका तथा सहकारी प्रवृत्ति जैसे अनेक गुणों की समुद्र होती है. ऐसे में नारी शक्ति की उच्च शिक्षा के साथ सुरक्षा और उनके सहकारी प्रवृत्ति के समुचित उपयोग से ही बिहार में बेहतर परिणाम लायी जा सकती है. प्रभात खबर की तरफ से आयोजित परिचर्चा में महिलाओं ने कहा कि महिलाओं के लिए मौके बढ़े हैं. इसके साथ ही उन्होंने खुद को साबित भी किया है कि वह किसी से कम नहीं हैं. आज वह हर उस क्षेत्र में काम कर रही हैं जिसे उनके लिए नामुमकिन समझा जाता था. पेज 05

हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं महिलाएं
महिलाएं आज पुरुषों से किसी रूप में कम नहीं हैं. धरती पर अगर उनके कदम, पुरुषों के कदम के बराबर हैं तो वहीं आसमां में वे पुरुषों के साथ उड़ने में पीछे नहीं हैं. हवाई जहाज तो दूर जेट फाइटर भी महिला पायलटों की हाथ में है.
मेरी एडलिन, राज्य संसाधन सेवी, शिक्षा विभाग
खुद को मजबूत कर आगे बढ़ सकती हैं महिलाएं
हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि हमारे लिए विशेष सुविधा होगी. बल्कि हमें खुद को उस अनुरूप ढाल लेना चाहिए कि हम हर जगह अपने बूते अपने कार्यों को अंजाम दे सकें.
पूनम झुनझुनवाला, बुटिक संचालिका

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