मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) : जिले के तुरकौलिया स्थित ऐतिहासिक नीम के पेड़ को बचाने की जद्दोजहद प्रशासनिक स्तर पर कागजी प्रक्रिया में है, दूसरी ओर ग्रामीणों ने पेड़ को धरोहर बताते हुए बचाने के लिए चबूतरा को तोड़ डाला है. नीम के पेड़ के नीचे 1917 में किसानों की व्यथा सुनने गांधी जी आये थे.
अंग्रेजों के तीनकठिया कानून का विरोध भी यहीं से शुरू हुआ. इसके बाद पेड़ को ऐतिहासिक पेड़ के रूप में देखा जाने लगा. हाल के दिनों में वन विभाग की रिपोर्ट पर जिला प्रशासन द्वारा पेड़ को बचाने के लिए संबंधित विभाग को चबूतरा तोड़ने के लिए पत्र लिखा गया. पत्र के जवाब में विभाग ने निर्देश दिया कि आवश्यकतानुसार चबूतरा तोड़ पेड़ बचाने का कार्य करें.
वन विभाग ने भी पेड़ बचाने के लिए चबूतरा तोड़ने की आवश्यकता जतायी थी. प्रभात खबर ने मुद्दा उठाया था. इधर चबूतरा तोड़ने की प्रक्रिया कागजी मामलों में उलझी होने के कारण स्थानीय लोगों ने नीम के पेड़ के पास का चबूतरा तोड़ डाला.
