बक्सर. जिले में चार विधान सभा क्षेत्रों में नामांकन की प्रक्रिया चल रही है. हर दल ने नारियों के साथ छलावा किया है. एक तरफ सरकार नारी सशक्तिकरण का नारा बुलंद कर रही है. हर क्षेत्र में उनके लिए आरक्षण दे रही है. लेकिन जिले के चार विधानसभा चुनावों में नारी छलती दिख रही है. जिले के सभी विधानसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में नारियों के सशक्तिकरण का नारा बुलंद करने वाली पार्टियां बैकफुट पर नजर आ रही है. नारी सशक्तीकरण का नारा गौण हो गया है. ज्ञात हो कि सीएम नीतीश कुमार एवं पीएम मोदी नारी सशक्तीकरण के प्रति गंभीर दिखने वाले राजनीति में भागीदारी देने में पिछड़ गये है. नारी सशक्तीकरण का श्लोगन बक्सर के महिला राजनीतिज्ञों के लिए छलावा साबित हो रही है. जिले में भाजपा के साथ ही अन्य दलों में भी महिला कार्यकर्ता सक्रिय है. जिनके प्रति महागठबंधन के साथ ही एनडीए गठबंधन ने कोई ख्याल नहीं रखा. जिले में कुल 12 लाख 85 हजार 136 मतदाता शामिल है. जिसमें आधी आबादी के कुल 6 लाख 7 हजार 631 महिला मतदाता शामिल है. जिन्हें जिले के किसी भी सीट से किसी पार्टी के द्वारा किसी भी महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया गया है. वहीं महिलाओं के उम्मीदवारी नहीं मिलने से महिलाओं में मायूसी भी कायम है. वहीं नारी सशक्तीकरण के नारों पर खरा नहीं उतरने वाले पार्टियों के लिए आइना दिखाने के लिए बक्सर विधानसभा से प्रमिला देवी एवं अंतिम दिन नीतू देवी ने निर्दलीय रूप में अपनी दावेदारी ठोक सभी पुरुष प्रत्याशियों को चुनौती दे दी है. ज्ञात हो कि पंचायत से लेकर नौकरी तक में महिलाओं को भागीदारी देने की राग अलापने वाले पार्टियों के लिए यह मंथन का समय है. सभी क्षेत्रों में महिलाओं को नारी सशक्तीकरण के तहत भागीदारी तो मिल रही है. लेकिन जहां देश व राज्य की राजनीति में भागीदारी की बात होती है, तो नारी सशक्तीकरण का नारा पूरी तरह से गौण हो जाता है.
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