डुमरांव. शिक्षकों के प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक, उपयोगी और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से डायट डुमरांव में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य कक्षा 1 से 12 तक के शिक्षकों के लिए आवश्यकता-आधारित मूल्यांकन प्रपत्र का निर्माण करना रहा. कार्यक्रम का उद्घाटन सर्व शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी चंदन द्विवेदी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी डुमरांव सुधांशु कुमार तथा डायट डुमरांव के प्राचार्य विवेक मौर्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. प्रशिक्षण को उपयोगी बनाने पर जोर : उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डीपीओ चंदन द्विवेदी ने कहा कि यदि शिक्षकों की व्यक्तिगत एवं शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण मॉड्यूल और उद्देश्य तैयार किए जाएं, तो वे शैक्षिक चुनौतियों के समाधान में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे. वहीं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने कहा कि सामाजिक और स्थानीय पृष्ठभूमि में बदलाव के साथ छात्रों और शिक्षकों की आवश्यकताएं भी बदलती हैं, जिन्हें चिन्हित करने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं बेहद उपयोगी हैं. डायट के प्राचार्य विवेक मौर्य ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थान के नेतृत्वकर्ता के रूप में ऐसे आयोजनों से शिक्षकों के कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी. अवधारणा और संकेतकों पर चर्चा : कार्यशाला के प्रथम दिन कार्यशाला के उद्देश्य, अपेक्षित परिणाम तथा आवश्यकता-आधारित मूल्यांकन की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की गयी. इसके बाद शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करते हुए उनके लिए उपयुक्त संकेतकों का निर्धारण किया गया. प्रश्न निर्माण और प्रपत्र संरचना : द्वितीय दिवस में निर्धारित संकेतकों के आधार पर प्रश्नों व कथनों का प्रारूप तैयार किया गया. साथ ही प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक कक्षा स्तर के अनुरूप मूल्यांकन प्रपत्र की संरचना पर विस्तृत विमर्श हुआ और आवश्यकता-आधारित मूल्यांकन प्रपत्र का प्रारूप तैयार किया गया. पायलट टेस्टिंग के बाद मिलेगा अंतिम रूप कार्यशाला के समन्वयक एवं डायट के वरीय व्याख्याता नवनीत कुमार सिंह ने बताया कि बक्सर जिले के कक्षा 1 से 12 तक के शिक्षकों के लिए यह मूल्यांकन प्रपत्र तैयार किया जा रहा है. निर्मित प्रपत्र का पायलट टेस्टिंग कर प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जायेगा. विषय विशेषज्ञ आनंद मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षक प्रशिक्षण को आवश्यकता-आधारित, सतत और परिणामोन्मुखी बनाने पर विशेष बल दिया गया है, उसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह कार्यशाला आयोजित की गयी है. विषय विशेषज्ञ मनोज त्रिपाठी ने कहा कि प्रशिक्षण की वास्तविक आवश्यकता को पहचानने के लिए अब तक कोई मानकीकृत, वैज्ञानिक और व्यावहारिक मूल्यांकन प्रपत्र उपलब्ध नहीं था, जिसकी कमी को यह कार्यशाला पूरा करेगी. कार्यशाला में डॉ. मृत्युंजय राय, पवन कुमार मिश्रा, मो. इमाम अली, राजेश कुमार राय, रविशंकर गुप्ता, संदीप आर्य, अजीत कुमार, बिमल सिंह सहित जिले के विभिन्न स्तर के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभायी. इस अवसर पर भूपेंद्र सिंह यादव, अजित कुमार, आलोक सिंह, मनीष कुमार, सहदेव प्रसाद, सूर्य प्रकाश गुप्ता, लीलावती कुमारी, मनोरंजन कुमार, बिनोद सिंह, अनिल कुमार समेत कई शिक्षक एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
