बक्सर में जैविक खेती को बढ़ावा, किसानों को दी गई प्राकृतिक खाद और कीटनाशक बनाने की ट्रेनिंग

डुमरांव के कोरानसराय में जैविक खेती पर प्रशिक्षण आयोजित। कृषि विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव से बचने और वर्मी कंपोस्ट अपनाने की दी सलाह।

Buxar News : रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होने के बीच किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ाने की पहल की जा रही है. कृषि विभाग, बिहार सरकार की जैविक कॉरिडोर योजना के तहत डुमरांव प्रखंड की कोरानसराय पंचायत में जैविक खेती विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया. कार्यक्रम रविदास बाबा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से कराया गया. इसमें कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव के विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खेती के फायदे और इसके तरीकों की जानकारी दी.

रासायनिक खेती छोड़ जैविक अपनाने की अपील

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. मिथिलेश कुमार ने किसानों से यूरिया, डीएपी, एसएसपी, टीएसपी, पोटाश और रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने की अपील की. उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों पर रासायनिक दुष्प्रभाव कम करने और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए जैविक खाद, जैविक टॉनिक, जैविक कीटनाशक और फफूंदनाशक का प्रयोग बढ़ाना जरूरी है. किसानों को घर पर ही इन जैविक उत्पादों को तैयार कर खेतों में इस्तेमाल करने की जानकारी दी गयी. इससे मिट्टी की संरचना में सुधार के साथ मानव और अन्य जीव-जंतुओं को भी लाभ मिलेगा.

वर्मी कंपोस्ट को बताया जैविक खेती का आधार

सहायक तकनीकी प्रबंधक सह आईसीएस प्रबंधक विवेकानंद उपाध्याय ने कहा कि जैविक खेती शुरू करने वाले किसानों को सबसे पहले वर्मी कंपोस्ट तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए. जिन किसानों ने वर्मी पिट तैयार कर लिया है, वे उसमें गोबर, फसल अवशेष और केंचुआ डालकर खाद तैयार कर सकते हैं. वहीं, जिन किसानों के पास वर्मी पिट नहीं है, वे कृषि विभाग की योजना का लाभ लेकर इसका निर्माण करा सकते हैं.

जीवामृत से नीमास्त्र तक बताए जैविक खेती के तरीके

प्रशिक्षण में किसानों को घन जीवामृत, बीजामृत, जीवामृत, सहजन टॉनिक, ह्यूमिक एसिड, दही स्प्रे, ट्राइकोडर्मा, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र के प्रयोग की जानकारी दी गयी. विवेकानंद उपाध्याय ने जैविक खेती के लिए कम से कम एक देशी नस्ल की गाय पालने को भी उपयोगी बताया. उन्होंने किसानों को प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में जैविक खेती करने के तरीके समझाये.

मूंग और ढैंचा की हरी खाद लगाने की सलाह

कृषि समन्वयक सह प्रशिक्षक मृत्युंजय मिश्रा ने किसानों को वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया बतायी. उन्होंने खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए हरी खाद के रूप में मूंग और ढैंचा की खेती करने की सलाह दी. साथ ही जैविक खेती में इस्तेमाल होने वाले कई देशी नुस्खों की जानकारी भी किसानों को दी गयी.

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के सवालों का दिया जवाब

कार्यक्रम में वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव से डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. रीना राय, डॉ. जितेंद्र सिंह, डॉ. अविनाश झा और स्वीटी कुमारी शामिल हुईं. इस दौरान कृषि समन्वयक अरुण कुमार चतुर्वेदी, किसान सलाहकार हरि भगवान समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे. विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं और सवालों का समाधान बताते हुए जैविक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया.


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By विनीत कुमार मिश्रा

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