चुनाव में लगे अधिकतर वाहनों का इंश्योरेंस और प्रदूषण फेल
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत जिले में अर्धसैनिक बलों का आना शुरू हो गया है. इन बलों के सुगम आवागमन के लिए परिवहन विभाग को वाहनों की व्यवस्था का जिम्मा सौंपा गया है.
By AMLESH PRASAD | Updated at :
बक्सर. विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत जिले में अर्धसैनिक बलों का आना शुरू हो गया है. इन बलों के सुगम आवागमन के लिए परिवहन विभाग को वाहनों की व्यवस्था का जिम्मा सौंपा गया है. लेकिन परिवहन विभाग की लापरवाही और नियमों की अनदेखी इस प्रक्रिया में उजागर हो रही है. मंगलवार को जब प्रभात खबर की टीम परिवहन विभाग के कार्यालय पहुँची, तो वहां दर्जनों वाहन जब्त किये गये थे. इन वाहनों के मालिक अपने-अपने लग बुक खुलवाने के लिए कार्यालय में घंटों से इंतजार कर रहे थे. परंतु हैरानी की बात यह थी कि जिन वाहनों को चुनाव ड्यूटी के लिए उपयोग में लाया जा रहा है, उनमें से अधिकांश का इंश्योरेंस और प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध नहीं पाया गया. इसके अतिरिक्त, ऐसे ड्राइवर सामने आए हैं जिनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है. ऐसे में यह गंभीर सवाल उठता है कि जिन वाहनों और चालकों को आम जनता की सुरक्षा व चुनाव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में लगाया जा रहा है, उनकी वैधता की जांच क्यों नहीं की जा रही. यह भी देखने को मिला कि जिन वाहन मालिकों के वाहन दो दिन पहले ही जब्त किये गये थे, उनकी अभी तक लग बुक नहीं खोली गयी है. जबकि मंगलवार को जिनके वाहन जब्त किये गये, उनका लग बुक उसी दिन खोल दिया गया. इस पक्षपातपूर्ण रवैये से वाहन मालिकों में काफी नाराजगी देखी गयी. जब्त की गयी स्कॉर्पियो के मालिक हरिचंद्र गुप्ता ने बताया मेरी गाड़ी दो दिन पहले जब्त की गयी, लेकिन अभी तक लग बुक नहीं खोली गयी है. जबकि जिन लोगों के वाहन आज ही जप्त किए गए हैं, उनका लग बुक खोल दिया गया। आखिर यह दोहरा मापदंड क्यों. इस पूरे मामले को लेकर जब जिला परिवहन पदाधिकारी शशिकांत से बात की गयी, तो उन्होंने कहा ऐसा कुछ नहीं है. यदि इस तरह की कोई बात है तो इसकी जांच करवायी जायेगी. परंतु जब एक तरफ परिवहन विभाग दिन-रात नियमों और कानूनों की बात करता है, वहीं खुद ही उनके उल्लंघन का जिम्मेदार बनता दिख रहा है. यह स्थिति न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि चुनाव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी शंका उत्पन्न करती है.
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