बक्सर. राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय बक्सर में सोमवार को जलवायु अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र, आधारभूत संरचना, पर्यावरण और विद्युत प्रणाली विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ. यह कार्यशाला बिहार मौसम सेवा केंद्र, पटना के संयुक्त सहयोग से आयोजित की जा रही है और 13 से 17 अक्तूबर 2025 तक चलेगी. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से किया गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो (डॉ) टीएन सिंह, निदेशक, आइआइटी पटना, के साथ विशिष्ट अतिथियों निदेशक, बिहार मौसम सेवा केंद्र पटना डॉ सीएन प्रभु, वैज्ञानिक-जी, वाडिया संस्थान ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून डॉ एचके साचन, सह-प्राध्यापक, आइआइटी (बीएचयू) वाराणसी डॉ कमलेश कुमार पांडे एवं संस्थान के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ राम नरेश राय उपस्थित रहे. मुख्य अतिथि प्रो (डॉ) टीएन सिंह ने अपने भाषण में जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने छात्रों से संवाद करते हुए उन्हें पर्यावरणीय संरक्षण, सतत विकास और लचीली आधारभूत संरचना के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया. इस अवसर पर प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु अनुकूल और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित आधारभूत संरचना का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्होंने प्रतिभागियों को इस कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया. कार्यशाला के उद्देश्य और पूरी कार्यशाला के प्रारूप पर संस्थान के डीन अकादमिक, डॉ. अंजनी कुमार तिवारी ने विस्तृत चर्चा की, जबकि संस्थान के विशेष पहलुओं के बारे में सह-प्राध्यापक डॉ श्याम लाल ने जानकारी साझा की. कार्यशाला के संयोजक डॉ. शैलेश कुमार, डॉ जितेन्द्र प्रताप सिंह और डॉ विक्रम कुमार हैं. डॉ जीवेश उज्जवल, विभागाध्यक्ष, सिविल विभाग ने सह-समन्वयक के रूप में कार्यशाला के आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया. सोमवार की कार्यशाला में डॉ. सीएन.प्रभु, डॉ कमलेश कुमार पांडेय एवं डॉ विक्रम कुमार, वैज्ञानिक, बिहार मौसम सेवा केंद्र, पटना मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता साझा की. अन्य विशेषज्ञ, शिक्षक और विद्यार्थी भी उपस्थित रहे. जिन्होंने जलवायु परिवर्तन और जल संसाधन प्रबंधन जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण चर्चाएं कीं. कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को तकनीकी दृष्टि से सशक्त बनाना और उन्हें पर्यावरणीय तथा जलवायु संबंधित चुनौतियों के प्रति जागरूक करना है. कार्यक्रम का समापन एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आरएन यादव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया. उन्होंने सभी अतिथियों, संयोजकों, विशेषज्ञों, शिक्षकों और छात्रों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कार्यशाला को सफल और ज्ञानवर्धक बनाने में योगदान दिया.
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