Buxar News (डुमरांव से सुजीत कुमार ओझा की रिपोर्ट) :
कोरानसराय थाना क्षेत्र के करूअज गांव में गुरुवार की सुबह एक विवादित भूखंड को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए. स्थिति बेहद तनावपूर्ण होने की सूचना मिलते ही कोरानसराय एसएचओ प्रमोद कुमार और डुमरांव के प्रभारी अंचलाधिकारी (सीओ) कुमार दिनेश भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने समय रहते दोनों पक्षों के बीच हस्तक्षेप कर संभावित हिंसक टकराव को टाल दिया. प्रशासन ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया तथा फिलहाल जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का कड़ा निर्देश दिया है.
दशकों पुरानी जमीन को रैयतदार द्वारा बेचे जाने पर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, गांव के मुख्य मार्ग के किनारे स्थित एक भूखंड का वर्षों से अनुसूचित जाति समुदाय द्वारा कब्रिस्तान के रूप में उपयोग किया जाता रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि दशकों पूर्व कोपवां के एक रैयतदार ने यह जमीन स्वेच्छा से कब्रिस्तान के लिए समुदाय को उपलब्ध कराई थी. हालांकि, हाल के दिनों में उसी परिवार द्वारा उक्त भूमि को गांव के ही तीन लोगों के नाम बेच दिए जाने के बाद नया विवाद उत्पन्न हो गया. कुछ दिन पूर्व जमीन खरीदने वाले लोगों ने भूखंड पर मौजूद सूखे पेड़ों को काटने का प्रयास किया था, जिसका अनुसूचित जाति बस्ती के लोगों ने पुरजोर विरोध किया था.
तारबंदी के दौरान बढ़ा तनाव, मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
गुरुवार को समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तान की भूमि की सुरक्षा के लिए कंटीले तारों से घेराबंदी शुरू कर दी. इसी दौरान दूसरा पक्ष भी मौके पर पहुंच गया और जमीन को अपनी रैयती बताते हुए घेराबंदी हटाने की मांग करने लगा. इससे दोनों पक्षों के बीच माहौल गर्म हो गया. स्थिति बिगड़ने से पहले ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और प्रभारी सीओ को भी बुला लिया गया. दोनों अधिकारियों ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उन्हें कानून-व्यवस्था हाथ में न लेने की सख्त चेतावनी देते हुए शांत कराया.
सीओ बोले- वर्षों से कब्रिस्तान के रूप में हो रहा उपयोग, मौजूदा स्थिति रहेगी कायम
मौके पर मौजूद प्रभारी सीओ कुमार दिनेश ने मामले पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि जिस भूमि का वर्षों से कब्रिस्तान के रूप में उपयोग होता आ रहा है, उसका उपयोग आगे भी कब्रिस्तान के रूप में ही होना चाहिए. वहीं, एसएचओ प्रमोद कुमार ने बताया कि त्वरित कार्रवाई के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने घर लौट गए हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचते, तो यह विवाद बड़ी हिंसक झड़प का रूप ले सकता था. फिलहाल प्रशासन ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने को कहा है और पुलिस मामले पर पैनी नजर रख रही है.
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