राजपुर में किसान गोष्ठी आयोजित, जलवायु अनुकूल खेती और प्राकृतिक खेती पर दिया जोर

Buxar News : राजपुर प्रखंड में आयोजित किसान गोष्ठी में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और उससे निपटने के तरीकों पर प्रकाश डाला. ड्रिप सिंचाई, डिजिटल खेती और प्राकृतिक खेती के महत्व पर जोर दिया गया.

Buxar News : राजपुर प्रखंड के ई-किसान भवन परिसर में बुधवार को किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता बीएओ ऋषिकेश यादव ने की, जबकि संचालन एटीएम योगेश मिश्र ने किया. कार्यक्रम का उद्घाटन बीस सूत्री अध्यक्ष फुटुचंद सिंह, बीडीओ मनोज कुमार और बीएचओ मिथिलेश सिंह ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया.

बीडीओ मनोज कुमार ने कहा कि किसानों को अब जलवायु अनुकूल खेती अपनाने की जरूरत है. जलवायु में हो रहे बदलाव का खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. ऐसे में किसानों को फसलों का उत्पादन और भंडारण वैज्ञानिक तरीके से करना चाहिए.

ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर से पानी बचाने पर जोर

बीएचओ मिथिलेश सिंह ने किसानों को ड्रिप सिंचाई और मिनी स्प्रिंकलर के उपयोग के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से पानी की बचत के साथ फसल का उत्पादन किया जा सकता है. किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मशरूम की खेती करने वाले किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

कृषि योजनाओं और यंत्रों की दी गयी जानकारी

कृषि समन्वयक संजय सिंह ने कृषि से संबंधित विभिन्न योजनाओं और कृषि यंत्रों की जानकारी किसानों को दी. उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की. वहीं, एटीएम प्रिया सिंह ने डिजिटल खेती पर चर्चा करते हुए कहा कि अब खेती से जुड़ी कई सुविधाएं मोबाइल पर उपलब्ध हो रही हैं. बीज उपचार, कीट प्रबंधन और खेती से संबंधित अन्य जानकारियां भी विशेषज्ञों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती हैं.

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जैव कार्बन की कमी से घट रही मिट्टी की उर्वरता

कृषि समन्वयक धनंजय राय ने प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती हमारी पुरानी कृषि पद्धति है, जिसमें घर के आसपास उपलब्ध खरपतवार से खाद तैयार कर खेती की जा सकती है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में क्षेत्र के किसानों के लिए मिट्टी में जैव कार्बन की कम होती मात्रा चिंता का विषय है. मिट्टी जांच में जैव कार्बन की मात्रा कम पाए जाने से फसलों की पैदावार में कमी आयी है और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है.

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किसान रहे मौजूद

किसान गोष्ठी में अंकित सिंह, सुनील सिंह, बंशनारायण राम, अनिल सिंह, रीता देवी, मीना देवी और देवधारी सिंह के अलावा अन्य किसान मौजूद रहे.

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By पंकज कुमार कमल

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