दीपावली के अवसर से पहले बाल विकास केन्द्र हितन पडरी में रंगोली कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
By AMLESH PRASAD | Updated at :
बक्सर. दीपावली के अवसर से पहले बाल विकास केन्द्र हितन पडरी में रंगोली कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने रंग-बिरंगे रंगों से आकर्षक रंगोलियां बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया. बच्चों द्वारा बनायी गयी रंगोलियों में पारंपरिक आकृतियों से लेकर दीपावली से जुड़े विविध चित्र देखने को मिले. रंगोलियों से पूरा विद्यालय प्रांगण उत्सवमय और आनंददायक वातावरण से भर गया. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना तथा उनमें रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना रहा. विद्यालय के निदेशक छतीश चंद्र त्रिपाठी ने कहां कि दीपावली प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है, जो कई खास बातों से जुड़ा है. यह भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है, लेकिन इसके कई अन्य सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी हैं, जैसे कि जैन धर्म में भगवान महावीर का निर्वाण और सिख धर्म में गुरु हरगोबिंद सिंह जी की रिहायी. इस दौरान लोग घरों को सजाते हैं, नये कपड़े पहनते हैं, मिठाई और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भगवान राम की वापसी रावण को हराने के बाद भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के अयोध्या लौटने की खुशी में दीपावली मनायी जाती है. लक्ष्मी पूजा यह धन और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा का प्रमुख दिन है.यह पर्व दशहरे के बाद शुरू होता है और धनतेरस, नरक चतुर्दशी, गोवर्धन पूजा और भाईदूज जैसे पर्वों की एक शृंखला है. परंपराएं और रीति-रिवाज सजावट लोग अपने घरों को दीपों, रंग-बिरंगी लाइट्स और रंगोली से सजाते हैं. अंत में विद्यालय परिवार ने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दीं.
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