बक्सर में नौ दिवसीय मानस ज्ञान गंगा यज्ञ का समापन, प्रेमाचार्य बोले- राम कथा से धन्य हो जाती है धरती

बक्सर के सिद्धाश्रम में नौ दिनों तक चले मानस ज्ञान गंगा यज्ञ का समापन भंडारे के साथ हुआ. प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने कहा कि राम कथा सुनने मात्र से धरती धन्य हो जाती है और उन्होंने कथा के आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी.

Premacharya : बक्सर. सिद्धाश्रम बक्सर के पौराणिक श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में नौ दिनों से चल रहे मानस ज्ञान गंगा यज्ञ का बुधवार को भंडारे के साथ समापन हो गया. अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचे और श्रीराम कथा का श्रवण किया. कथा के बाद आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया.

नौ दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन के दौरान श्रीराम कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, धर्म और सदाचार का संदेश दिया गया. अंतिम दिन भी मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा.

कथा सुनने के साथ जीवन में उतारना भी जरूरी

व्यासपीठ से प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने कहा कि जिन स्थानों पर भगवान की कथा होती है, वहां रहने वाले लोग धन्य होते हैं और उन पर भगवान की कृपा बनी रहती है. उन्होंने आयोजन में सहयोग के लिए जय भोलेनाथ ग्रुप और पंडा समाज के सदस्यों की सराहना की.

उन्होंने कहा कि समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था की गयी, जो सनातन धर्म के लिए स्तुत्य और अनुकरणीय प्रयास है. महाराज ने कहा कि केवल कथा सुन लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कथा से मिलने वाली सीख को अपने जीवन और आचरण में उतारना भी जरूरी है.

उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रभु भक्ति के मार्ग पर चलने और भगवान श्रीराम के बताए आदर्शों का पालन करने का आह्वान किया.

भरत मिलाप से राम राज्याभिषेक तक सुनाये प्रसंग

यज्ञ के अंतिम दिन कथा के दौरान प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने भरत मिलाप, सीता हरण, रावण वध और राम राज्याभिषेक जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया. इन प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों और उनके जीवन संदेश को श्रद्धालुओं के सामने रखा.

उन्होंने कहा कि श्रीराम को जानने और पूर्ण गुरु की कृपा प्राप्त होने से ही जीव अपने अंत:करण में श्रीराम का दर्शन कर सकता है. कथा के दौरान राम राज्य की अवधारणा को भी विस्तार से समझाया गया.

महाराज ने कहा कि राम राज्य एक आदर्श व्यवस्था का प्रतीक है, जहां चोरी, भ्रष्टाचार, झूठ और घृणा के लिए कोई स्थान नहीं होता. वहां प्रेम, भाईचारा, सौहार्द और सद्भावना का वातावरण रहता है.

उन्होंने कहा कि आज समाज को भी इन्हीं मूल्यों की जरूरत है. लोगों के जीवन में प्रेम, भाईचारा और सद्भावना बढ़े और राम राज्य के आदर्श समाज में स्थापित हों, यही भगवान से प्रार्थना होनी चाहिए.

कथा के समापन के बाद मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया. इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन का विधिवत समापन हुआ.

1.कथा व्यास श्री परमाचार्य जी 2. कथा श्रवण करते श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network


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By ओंकार नाथ मिश्रा

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