Buxar News: (ब्रह्मपुर से संतोष कांत की रिपोर्ट):
बक्सर से लेकर भोजपुर जिले को हर साल बाढ़ की त्रासदी से बचाने वाले अति संवेदनशील बक्सर-कोइलवर तटबंध की सुरक्षा फिलहाल भगवान भरोसे नजर आ रही है. बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा कराए जा रहे कटावनिरोधी और सुदृढ़ीकरण कार्य में बरती जा रही घोर लापरवाही को लेकर अब पूरे क्षेत्र में जन-आक्रोश भड़क उठा है. ब्रह्मपुर अंचल के नैनीजोर से लेकर भोजपुर जिला के लालू डेरा तक करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे सुरक्षा कार्य की कछुआ गति ने विभागीय दावों की पोल खोल कर रख दी है. आलम यह है कि बारिश का मौसम सिर पर आ चुका है, लेकिन तटबंध को सुरक्षित करने के लिए किया जा रहा बुनियादी काम भी आधा-अधूरा है.
फरवरी में खुली थी फाइल, मार्च और अप्रैल में सोता रहा विभाग
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस सुरक्षा कार्य की योजना को धरातल पर उतारने के लिए इसी साल फरवरी महीने में काम शुरू किया गया था. शुरुआती कुछ दिनों तक संवेदक (ठेकेदार) द्वारा तत्परता दिखाई गई, जिससे इलाके के लोगों में एक उम्मीद जगी थी. लेकिन इसके ठीक बाद, बिना किसी ठोस वजह के काम को पूरे दो महीने के लिए पूरी तरह ठप कर दिया गया. मार्च और अप्रैल के महत्वपूर्ण महीनों में, जब नदियों का जलस्तर सबसे निचले स्तर पर था और काम को पूरी मजबूती के साथ अंजाम दिया जा सकता था, तब विभाग और संवेदक दोनों मूकदर्शक बने रहे.
अब जब जून में मानसून की दस्तक होने वाली है और गंगा व उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में कभी भी उफान आ सकता है, तब जाकर आनन-फानन में काम को दोबारा शुरू किया गया है. इतने कम समय में इतने लंबे-चौड़े दायरे में सुरक्षा कार्य को गुणवत्ता के साथ पूरा करना अब तकनीकी रूप से नामुमकिन नजर आ रहा है.
जियो बैग्स के खेल में भ्रष्टाचार की बू, शुरू होने से पहले ढह गई नींव
तटबंध की सुरक्षा के लिए तकनीकी रूप से ‘जियो बैग्स’ (विशेष प्रकार की बोरियां) में बालू भरकर उन्हें कटाव वाले स्थलों पर व्यवस्थित करने का नियम है. लेकिन मौके पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है. ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस कार्य में न तो सही अनुपात में बालू का इस्तेमाल हो रहा है और न ही बोरियों को सही तकनीकी मापदंडों के अनुसार रखा जा रहा है.
कटाव कार्य का फाउंडेशन (नींव) पानी के तेज बहाव को झेलना तो दूर, सामान्य दिनों में ही ध्वस्त होने लगा है. काम पूरा होने से पहले ही अगर नींव दरक रही है, तो साफ है कि इसमें बड़े पैमाने पर लूट-खसोट और भ्रष्टाचार हुआ है. ग्रामीणों का सवाल है कि जब जलस्तर कम था और मौसम अनुकूल था, तब दो महीने तक काम को किस अधिकारी के संरक्षण में रोका गया. बिना उचित निगरानी के जो जियो बोरियां डाली जा रही हैं, क्या उनकी जांच के लिए कोई तकनीकी टीम मौके पर पहुंची है.
हजारों एकड़ फसल और दर्जनों गांवों पर मंडराया तबाही का साया
बक्सर के नैनीजोर से लेकर भोजपुर के लालू डेरा तक का यह पूरा इलाका हर साल बाढ़ की भयंकर त्रासदी झेलता है. अगर यह तटबंध समय रहते पूरी मजबूती के साथ तैयार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट जाएगा और हजारों एकड़ में लगी किसानों की गाढ़ी कमाई की फसल जलमग्न हो जाएगी. विभाग की इस मनमानी और लापरवाही की कीमत इस बार भी सैकड़ों गांवों के गरीब किसानों को अपनी फसल और घर गंवाकर चुकानी पड़ सकती है.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, जल संसाधन मंत्री और बक्सर व भोजपुर के जिलाधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे कार्य की अविलंब उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए और दोषी अभियंताओं व ठेकेदारों पर प्राथमिकी दर्ज की जाए, ताकि समय रहते इस आपदा से घनी आबादी को बचाया जा सके.
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