Buxar News: कलश स्थापन के साथ आज से शुरू होगा बासंतिक नवरात्र

शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की आराधना का महापर्व वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ रविवार को होगा. पहले दिन कलश स्थापन के साथ ही मां भगवती की आराधना शुरू की जाएगी.

बक्सर

. शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की आराधना का महापर्व वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ रविवार को होगा. पहले दिन कलश स्थापन के साथ ही मां भगवती की आराधना शुरू की जाएगी.

मंदिरों से लेकर घरों तक में इस महापर्व की तैयारियां शनिवार को पूरी कर ली गई. इसको लेकर साफ-सफाई व पूजा सामग्रियों की खरीदारी की गई और आचार्यों को आमंत्रित किया गया. वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और नवमी तिथि को हवन-पूजन के साथ समापन किया जाता है. आचार्यों के मुताबिक सूर्योदय काल से लेकर अपराह्न 2.14 बजे तक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का योग रहेगा. लिहाजा सूर्योदय से लेकर अपराह्न 2 बजे तक कलश स्थापन होगा. पूजा के सामानों की खरीदारी को लेकर बाजारों में चहल-पहल रहा. जिससे दुकानदार भी पूरे दिन व्यस्त रहे. नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापन के साथ ही मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की उपासना की जाएगी. देवी मां के उपासक संपकल्प के साथ उपवास व्रत रखेंगे तथा माता रानी की पूजा एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगे. नव संवत्सर 2082 का आज से आगाज : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नव संवत्सर 2082 का आगाज हो जाएगा. इसी के साथ ही हिन्दू नव वर्ष प्रारंभ हो जाएगा.नव वर्ष को लेकर लोग काफी उत्साहित हैं. क्योंकि वासंतिक नवरात्र के साथ ही संवत्सर का नाम भी बदल जायेगा. नव संवत्सर का नाम कालयुक्त होगा. इससे पूर्व 2081 संवत्सर का नाम पिंगल था. ऐसे में पूजन संकल्प आदि विधि में पिंगल नाम संवत्सर के स्थान पर कालयुक्त नाम संवत्सर का उच्चारण किया जाएगा. क्योंकि 30 मार्च से लेकर एक वर्ष तक काल युक्त संवत्सर रहेगा. आठ दिनों का होगा नवरात्र : आचार्य श्रीकृष्णानंद जी पौराणिक ने बताया कि यह वासन्तिक नवरात्र व्रत आठ दिनों का होगा. क्योंकि पंचांग के मुताबिक पंचमी तिथि की हानि हो रही है. श्रीराम नवमी व्रत निर्विवाद रूप से 6 अप्रैल रविवार को मध्याह्न काल में मनाया जाएगा. उन्होंने बताया कि नवरात्र का व्रत 30 मार्च रविवार से प्रारम्भ होकर 6 अप्रैल रविवार तक रखा जाएगा. नवरात्र व्रत का पारण 7 अप्रैल दिन सोमवार को होगा. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हुआ था सृष्टि का आरंभ : पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक सृष्टि का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हुआ था. क्योंकि सृष्टि की रचना के साथ ही ब्रह्मा जी ने काल की गणना उसी दिन से निर्धारित की थी. वरिष्ठ अधिवक्ता व साहित्यकार रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने कहा कि चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि अध्यात्मिक महत्व तो रखता ही है सांस्कृतिक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह पावन दिन है. इस दिन कलश स्थापन के साथ ही शक्ति की आरधना की जाती है. जो शांति के साथ ही शक्ति का प्रतीक है.

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