बक्सर : मानवीय संवेदना को तार-तार करनेवाली घटना में फिर से रेलकर्मियों का चेहरा सामने आया है. सोमवार की दोपहर ट्रेन से कट कर एक बुजुर्ग की मौत हो गयी और उसका शव लगभग एक घंटे तक पटरियों के बीच में पड़े रहा. इस बीच लोगों की भीड़ जुट गयी, लेकिन जीआरपी लगभग एक घंटे बाद घटना स्थल पर पहुुंची़ पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया़ इस संबंध में जब जीआरपी से देर होने की वजह पूछी गयी, तो उन्होंने स्टेशन मास्टर पर आरोप लगाते हुए कहा कि डेड बॉडी के डिस्पोजल में सहयोग नहीं करते हैं.
वहीं, जब स्टेशन मास्टर महेंद्र सिंह से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि पोर्टर किसी अन्य काम से गया हुआ था, जिसके चलते घटना स्थल पर समय से नहीं भेजा गया़ घटना के बारे में स्टेशन पर मौजूद शिक्षक ऋषिकेश त्रिपाठी ने बताया कि तकरिबन एक घंटे तक शव लवारिश की तरह पड़ा रहा. जब मीडिया को इसकी सूचना दी गयी, तो पुलिसकर्मी जल्दी-जल्दी शव को हटाने के लिए घटना स्थल पहुंचे.
श्री त्रिपाठी ने बताया कि घटना में बुजुर्ग का सिर्फ हाथ कटा था, अगर समय पर इलाज मिलता, तो उसकी जान बच सकती थी़ ऐसा नहीं है कि पुलिस का इस तरह का असंवेदनशील चेहरा पहली बार देखने को मिला है, बल्कि पूर्व में भी कोईरपुरवा निवासी नजमा ट्रेन की चपेट में आ जाने से घायल हो गयी थी और घंटों मौत से लड़ती रही, लेकिन रेल पुलिस घटना स्थल पर नहीं पहुुंची तथा तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गयी.
