परेशानी. इटाढ़ी व राजपुर फीडर में आयी खराबी, पेड़ों को भी हुआ नुकसान
सब्जी की खेती को मिली संजीवनी
बिजली ठप होने से पानी का भी रहा संकट
देर शाम तक सामान्य हो सकी बिजली व्यवस्था
बक्सर : शनिवार की सुबह लगभग दो बजे उठी धूल भरे अांधी के चलते गरमी में अपने घर की छतों पर सो रहे लोगों की नींद हराम हो गयी. धूल भरी आंधी से बचने के लिए लोगों को अपने घरों के कमरों में शरण लेनी पड़ी. लगभग 40 मिनट तक चली इस आंधी के चलते नगर का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. तेज हवा के कारण शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति ठप हो गयी और जगह-जगह हुए ब्रेक डाउन के चलते करीब चार से पांच घंटे तक बिजली की आपूर्ति भी बाधित रही.
कई स्थानों पर पेड़ की टहनियां बिजली के तार पर टूट कर गिर गयीं, जिससे बिजली ठप पड़ गयी. युद्ध स्तर पर चलाये गये मरम्मत कार्यों के बाद करीब चार-पांच घंटे के बाद बिजली व्यवस्था ठीक हो सकी. बिजली गुल रहने से पानी का संकट भी शहरवासियों को झेलना पड़ा और लोगों को पानी के लिए भी मशक्कत करनी पड़ी. आंधी से सर्वाधिक आम की फसल को नुकसान हुआ और लगे टिकोले बरबाद हो गये. सूर्यमुखी के पेड़ तेज हवा में जमीन से सट गये. सब्जी की फसलों को बूंदा-बांदी से संजीवनी मिली, जबकि मड़ाई के लिए खलिहान में रखे गेहूं के बोझे उड़ गये और उसकी भी बरबादी हई.
आंधी से हुई आम की फसल की बरबादी: तेज आंधी से आम की फसल को काफी नुकसान हुआ है. आम के टिकोला बड़ी संख्या में पेड़ों से गिर गये. आंधी के चलते आम के टिकोलों की हुई क्षति के कारण बागबानों में आम के अच्छी पैदावार की उम्मीद पर पानी फिर गया. इसको लेकर आम उत्पादक किसानों में मायूसी छा गयी है. कृषि विशेषज्ञों की मानें, तो आम के टिकोलों में 20 से 30 फीसदी की बरबादी हुई है.
आंधी के कारण गड़बड़ायी बिजली आपूर्ति : आंधी के चलते बिजली के तार आपस में टकराने से हुए शाॅर्ट सर्किट के कारण बिजली शहर में घंटों गुल रही, जिससे शहर के लोगों को काफी परेशानी हुई. शहर के चक्रहंसी में बिजली के खंभे पर लगा इनसुलेटर खराब हो गया, जबकि कृतपुरा में पेड़ की टहनियां बिजली के तार पर गिर गयीं. ग्रामीण क्षेत्र में चौसा से राजपुर फीडर में गड़बड़ी आ गयी, जबकि इटाढ़ी फीडर से जुड़े तार आंधी के कारण उलझ गये. इसके अतिरिक्त सरेंजा में पेड़ टूट कर बिजली के तार पर गिर गया, जिससे आपूर्ति ठप पड़ गयी. दो बजे भोर से ही बिजली के गायब रहने से गरमी का पारा चढ़ने के साथ-साथ लोगों में बेचैनी बढ़ने लगी.
सब्जी की फसल को मिली संजीवनी : धूल भरी आंधी के चलने से अचानक आयी मौसम के तापमान में गिरावट के कारण सब्जी की फसल की पैदावार बढ़ने की उम्मीद जगी है. मौसम के बदलाव व बूंदाबांदी के चलते सब्जी को लाभ मिला है. बह रही पुरवा हवा के चलते तापमान में आयी गिरावट और आर्द्रता बढ़ने के कारण जेठुआ सब्जी के उत्पादन में वृद्धि होने से सब्जी उत्पादक किसानों में संतोष है.
वहीं, किसी कारण से अपने गेहूं की फसल की मड़ाई नहीं कर पाये किसानों का खलिहान में रखा बोझा बरबाद हुआ. आंधी के चलते उड़ कर बिखरने से कुछ क्षति हुई है. आंधी के चलते सूरजमुखी की फसल के लोट जाने से नुकसान पहुंचा है.
तेज आंधी से विद्युत आपूर्ति बाधित : राजपुर. भीषण गरमी के कारण तापमान में हुई बढ़ोतरी के बाद शुक्रवार की रात आयी तेज आंधी ने जम कर उत्पात मचाया. तेज आंधी के कारण आम के बगीचों को काफी नुकसान हुआ है. छोटे-छोटे आम के टिकोले गिर गये हैं, जबकि बिजली तार और खंभों के क्षतिग्रस्त होने के कारण पूरे क्षेत्र में शनिवार को सारे दिन बिजली सेवा बाधित रही.
इस संबंध में पूछे जाने पर राजपुर विद्युत विभाग के कनीय अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि क्षेत्र के सरेंजा में पेड़ गिरने और कई अन्य जगहों पर तार के टूटने से विद्युत आपूर्ति बाधित है. शनिवार की देर शाम तक विद्युत सेवा बहाल की जा सकी.
बूंदा-बांदी से खेतों की मिट्टी में आयी नमी
बिजली के साथ-साथ पेयजल संकट भी झेला शहरवासियों ने
बिजली के गायब रहने से जलापूर्ति नहीं हो पाने के कारण इसका असर लोगों के दिनचर्या पर भी पड़ा.लोग पानी के लिये बाल्टी लिये हैंड पंपों पर कतार लगाये नजर आये.आंधी के चलते भोर से ही गायब हुई बिजली के कारण बिजली का लुका-छिपी का खेल भी चलता रहा. बिजली नहीं रहने के कारण घरों में पानी के मोटर नहीं चल सके, जिसके कारण प्राय: घरों में शहरी क्षेत्र में जल संकट हो गया.
क्या कहते हैं बिजली अधिकारी
बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार सिंह ने बताया कि कई स्थानों पर आंधी-तूफान के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई. इटाढ़ी व राजपुर फीडर को भी आंधी से नुकसान हुआ है. आंधी से हुई जगह-जगह खराबी को ठीक करने में विभाग ने युद्ध स्तर पर काम किया, जिसके बाद भी आपूर्ति को नियमित करने में चार से पांंच घंटे का समय लगा.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक डाॅ देवकरण कहते हैं कि आम की बागवानी को सर्वाधिक क्षति हुई है. क्योंकि टिकोले बरबाद हुए हैं. इसके अतिरिक्त सूर्यमुखी की खेती को भी नुकसान हुआ है. उन्होंने आम उत्पादकों को सलाह दी की अमचूर अथवा टिकोलों के अन्य उत्पाद बना कर अपनी क्षतिपूर्ति की भरपाई कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि खेतों से 99 फीसदी गेहूं कट चुके होने के कारण गेहूं को कोई क्षति नहीं पहुंचा है.
