17 दिनों में दुष्कर्म के दो मामले आये सामने

बक्सर : सोनवर्षा गांव में दुष्कर्म की घटना जिले का दूसरा मामला है. 17 दिनों पूर्व होली में नगर थाना क्षेत्र के नया बाजार में दुष्कर्म का एक मामला सामने आया था, जिसमें दो लड़कों की गिरफ्तारी भी हुई थी. घटना के बाद सोनवर्षा गांव में अलग सा माहौल है. सभी की जुबान इस कुकर्म […]

बक्सर : सोनवर्षा गांव में दुष्कर्म की घटना जिले का दूसरा मामला है. 17 दिनों पूर्व होली में नगर थाना क्षेत्र के नया बाजार में दुष्कर्म का एक मामला सामने आया था, जिसमें दो लड़कों की गिरफ्तारी भी हुई थी. घटना के बाद सोनवर्षा गांव में अलग सा माहौल है. सभी की जुबान इस कुकर्म की चर्चा है.
सोनवर्षा गांव के जिस लड़के ने इस घटना को अंजाम दिया है. उसके संबंध में बताया जाता है कि वह (करीमन तुरहा) लफंगा प्रवृति का है, जो गांव से कई दिनों से गायब था. फिलहाल तीन से चार दिनों पहले ही गांव में आया था और इस घटना को अंजाम दिया. घटना के बाद से ही ग्रामीण अपनी बच्चियों को घर से बाहर भेजने में सुरक्षा को लेकर परेशान हैं. कल तक अपनी बच्चियों के प्रति बेफ्रिक रहनीवाली मां भी अब अपनी दुलारी को सीने से लगा कर रख रही हैं.
और इस बदलते सामाजिक परिवेश को कोस रही हैं.
आम लोगों में चर्चा यह भी है कि सूचना क्रांति के इस युग में बाजार ने पूंजी के लिए मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से ईलता भी परोसना शुरू कर दिया है, जिसके नतीजे दुष्कर्म के रूप में सामने आ रहे हैं. घटना के प्रति दुख प्रकट करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ तनवीर फरीदी ने कहा कि लोग पैसे और तरक्की के पीछे भाग रहे हैं. समाज को गाइड करनेवाले जिम्मेवार लोगों की कमी हो गयी है, जिसके कारण समाज गलत दिशा में जा रहा है.
उन्होंने कहा कि स्कूलों में नैतिक शिक्षा पर बल दिया जाये और बच्चों की पहली गलती पर ही उसे डांट पड़े. तब कही एक स्वच्छ समाज बन सकेगा. नैतिकता की कमी से ही लोगों में संवेदना खत्म हो रही है और लोग जानवर बनते जा रहे हैं. वहीं, साहित्यकार कुमार नयन ने कहा कि जब कभी ऐसी घटना होती है, तो पहले समाज में कुछ सुगबुगाहट होती है.
फिर सब कुछ शांत हो जाता है. जबकि ऐसी घटनाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाना चाहिए. नशाखोरी और जुआ के खिलाफ भी यह अभियान जरूरी है. यहां स्वच्छ वातावरण का नितांत अभाव है. अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये और उसकी सजा सार्वजनिक हो. वहीं, दुष्कर्मी के बचाव में कभी भी अधिवक्ताओं को सामने नहीं आना चाहिए. ऐसे में दुष्कर्म के मन में भय व्याप्त होगा.

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