ब्रह्मपुर : बाबा बरमेश्वरनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सोमवार की देर रात से ही अनवरत जारी है. महाशिवरात्रि को लेकर जिला प्रशासन की ओर से इस बार विशेष इंतजाम किया गया है. मंदिर परिसर से लेकर ब्रह्मपुर चौरास्ता तक पुलिस बलों की तैनाती की गयी है.
वहीं, यातायात व्यवस्था को लेकर मेले से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पार्किग की व्यवस्था की गयी है, जिससे मेले में आनेवाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो. मंदिर में जल चढ़ाने का सिलसिला सुबह दो बजे से ही शुरू हो गया था. मंदिर को रंग-बिरंगी रौशनी से सजाया गया है. महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बलों की भी इस बार तैनाती की गयी है.
महाशिवरात्रि की तैयारी
महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर को फूल और रंगीन बत्तियों से सजाया गया है. मध्य रात्रि के बाद दो बजे भोर से ही श्रद्धालुओं का पूजा-पाठ शुरू हो गया है, जो पूरी रात तक चलता रहेगा.रात के आठ बजे आरती होगी, जिसमें भक्त शरीक होंगे. पिछले वर्ष यहां एक लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, लेकिन इस वर्ष उसकी संख्या बढ़ कर करीब डेढ़ लाख तक पहुंचने की उम्मीद है.
पुजारी अक्षय गोपाल पांडेय, सच्चिदानंद पांडेय, उमलेश पांडेय व राधा मोहन पांडेय दिन-रात तैयारियों में लगे रहे. वे कहते हैं कि इस बार विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गयी है और प्रशासन ने भी मुकम्मल व्यवस्था कर रखा है. पुलिस बल की भी व्यापक तैनाती की गयी है.
यहां-यहां से पहुंचते हैं भक्त
शिवरात्रि के अवसर पर सोमवार की मध्य रात्रि से ही बस एवं अन्य गाड़ियों से बिहार के पटना, आरा, सासाराम, भभुआ, बक्सर, नावानगर सहित चौसा व यूपी के गहमर, गाजीपुर, बलिया सहित अन्य जगहों से श्रद्धालु एक पहुंचने लगे थे. मेला परिसर के पंडालों में लोग अपने-अपने साथियों के साथ डेरा जमा दिये थे. वहीं, यजमानो की रहने व खाने-पीने की व्यवस्था स्थानीय पंडा बाबा की ओर भी किया गया था. वहीं, दूर-दूर के दुकानदार भी मेले में अपने सामान बेचने के लिए पहुंच चुके हैं, जो शिवरात्रि के बाद तक भी रहेंग़े
बाहर से आनेवाले श्रद्धालुओं के पहुंचने का मार्ग
ब्रह्मपुर बाबा मंदिर तक पहुंचने के लिए पटना, कलकता, बनारस दिल्ली आदि जगहों के भक्त रेलवे स्टेशन रघुनाथपुर उतर कर टेंपो या टमटम से मंदिर तक पहुंच सकते हैं. यहीं, महाशिवरात्रि के दिन ज्यादा भीड़ होने की वजह से यातायात को मंदिर से पहले ही रोक दिया गया है. ऐसे में आप रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन से पैदल भी जा सकते हैं. स्टेशन से मंदिर की दूरी मात्र दो किलोमीटर की है.
क्या है मंदिर की मान्यता
ब्रह्मपुर स्थित शिव मंदिर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि स्वयं ब्रह्मा जी ने इस मंदिर की स्थापना की थी. किवदंतियों के अनुसार मुसलिम शासक औरंगजेब अपने शासनकाल में इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन वो ऐसा नहीं कर सका. यहां के पुरोहितों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब औरंगजेब यहां पहुंचा तो रात हो गयी थी. इसलिए उसने अपने सैनिकों से सुबह तक का इंतजार करने को कहा. इस बीच कुछ पुरोहितों ने मंदिर न तोड़ने की औरंगजेब से विनती की, जिस पर उसने गुस्सा होकर कहा, ठीक है मैं तुम्हारे भगवान की शक्ति को तभी मानूंगा.
जब रात भर में मंदिर का दरवाजा पूरब से पश्चिम की ओर हो जायेगा. रात भर पुरोहित इस चिंता में रहे कि अब तो शिव का मंदिर टूट जायेगा. औरंगजेब ने जो शर्त रखी है पता नहीं पूरा होगा या नहीं. नियत समय से सुबह हुआ, तो औरंगजेब व पुरोहित देखे की मंदिर का दरवाजा पूरब से पश्चिम की ओर हो गया है. फिर क्या था औरंगजेब ने शिव की शक्ति को देखा और वापस लौट गया. शिवमंदिर के पूरब में एक बड़ा सा तालाब है, जिसको शिवसागर तालाब कहते हैं.
इसका वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है. तालाब के बारे में मान्यता है कि इसमें स्नान करनेवालों का कुष्ट व चर्म रोग मिट जाता है. वहीं, एक मान्यता के अनुसार जिले के बुजुर्ग बताते हैं कि बाबा बरमेश्वरनाथ का शिव लिंग प्रति वर्ष एक जव बढ़ता है.
