बक्सर : उत्पादक अपने उत्पादन को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए बाजार पर निर्भर रहते हैं, लेकिन बाजार के अभाव में उत्पादकों को बिचौलियों के शिकंजे में फंस कर रह जाना पड़ता है, जिससे उत्पादक व उपभोक्ता अतिरिक्त आर्थिक बोझ सहन करते हैं. इससे हट कर आधुनिकता के सहारे बिचौलियों से बचने के लिए अजरुनपुर निवासी किसान धर्मराज (उम्र 35) ने एक नया रास्ता ढूंढ़ लिया है. धर्मराज ने सोशल साइट फेसबुक को ही नये विस्तृत बाजार के रूप में प्रयोग कर उससे लाभ उठाना शुरू कर दिये हैं.
दरअसल धर्मराज मैट्रिक पास हैं और वे चार बीघे जमीन पर खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. बाजार की कमी के कारण उन्हें खेती के लागत मूल्य से बहुत कम ही मुनाफा हो पा रहा था. धर्मराज ने बताया कि फेसबुक से जुड़ने के कारण वे जिले के कई लोगों से सीधे संपर्क में थे. ऐसे में उन्होंने फेसबुक पर अपने उत्पादक का फोटो सहित अन्य जानकारी व कीमत अपलोड कर दिया, जिसके बाद फेसबुक के माध्यम से उन्हें सीधे कई छोटे खरीदारों ने संपर्क किया. इस तरह वे अपने उत्पादन को अच्छे कीमत पर बेच पाये. साथ ही बिचौलियों से छुटकारा मिल गया. इसके अलावा खरीदार को भी सीधा उत्पादक से वस्तु प्राप्त हो गयी.धर्मराज अब अपने फेसबुक अकाउंट पर अन्य किसानों को भी जोड़ रहे हैं.
मनीष ने खुद के व्यवसाय को फेसबुक से जोड़ा
खलासी मुहल्ला निवासी मनीष केसरी व्यवसायी उम्र 19 ने खुद के व्यवसाय को फेसबुक से जोड़ कर एक नयी पहल की है. मनीष एक कलाकार के साथ-साथ किसान भी हैं. मनीष केसरी ने बताया कि वे फेसबुक पर अपना अकाउंट खोल रखा है. फेसबुक पर सैकड़ों लोग उनके संपर्क में हैं. ऐसे में उन्होंने अपने व्यवसाय को फेसबुक से जोड़ दिया. फेसबुक पर सजावट से संबंधित फोटो व अनाज को अपलोड कर आसानी से बेच रहे हैं. इतना नहीं मनीष ने बताया कि मेरे संकर्प में कई किसान आज आ चुके हैं.
खरीदारों की नहीं होगी कमी
छोटे किसानों को अपने फसल को अच्छी कीमत पर बेचने के लिए स्थानीय बाजार या क्रय केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है. जानकारों की मानें तो इस समय सरकार धान का मूल्य प्रति क्विंटल 1400 रुपये तय की है, लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों की बात करें, तो अधिकारियों की लापरवाही के कारण कई प्रखंडों में क्रय केंद्र नियमित नहीं खुलते हैं, जिससे किसानों को बड़े व्यापारियों के हाथ लगभग 900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से धान बेचना पड़ रहा है. ऐसे उन्हें 500 रुपये का हकमारी सहना पड़ रहा है.
इन सभी के बीच बाजार का बड़ा रोल होता है. या यूं कहें कि खरीदारों की कमी, लेकिन जब किसान अपने फसलों की गुणवत्ता, वर्ग, भंडारण कीमत को फेसबुक के माध्यम से प्रदर्शित करेंगे, तो खरीदारों की कमी नहीं होगी. इस तरह उत्पादक और खरीदारों से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा और बिचौलियों के चंगुल से किसानों को राहत मिलेगी. वहीं, किसानों को हर बार पांच सौ रुपये की हकमारी सहनी पड़ रही है. वह नहीं सहनी पड़ेगी. फेसबुक से किसानों को सीधे बड़ा बाजार मिलेगा और वे अपनी फसल को अच्छी कीमत बेच सकेंगे.
ऐसे बनाये फेसबुक को बाजार का जरिया
आज के दौर में फेसबुक से हर वर्ग के लोग किसी-न-किसी रूप से जुड़े हुए हैं. इस प्लेटफॉर्म पर करोड़ों लोग हर दिन जुड़ते हैं. ऐसे में थोड़े पढ़े-लिखे किसान या उनके घर के अन्य पढ़े सदस्य को अपनी फसलों का फोटो, गुणवत्ता की जानकारी, मात्र, कीमत समेत अन्य जानकारी फेसबुक पर अपलोड करनी होगी. फेसबुक पर इस सूचना के माध्यम से आपके फसल के खरीदार हजारों में मिल जायेंगे. इस तरह बाजार के नियम के अनुसार अधिक मांग होने से वस्तु की कीमत बढ़ जायेगी. इस तरह छोटे-छोटे खरीदारों का एक समूह बाजार का रूप ले लेगा.
ई-कॉमर्स से ध्यान हुआ आकृष्ट
बुद्धिजीवी वर्ग के कुमार नयन ने बताया कि ई-कॉमर्स के बढ़ते दायरे को देखते हुए लोगों का ध्यान ऑनलाइन खरीद-बिक्री बढ़ने लगा है. इसका बाजार तेजी से बढ़ रहा है. चीन के एक कंपनी ने मात्र दो दिनों में करोड़ों रुपये का व्यापार किया. अब सभी वर्ग के लोग आनेवाले समय में ऑनलाइन ही बाजार करेंगे. किसानों के लिए एक नया प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है.
किसानों ने भी माना ऐसी बाजार की जरूरत
नदॉव निवासी किसान अरुण महतो चार बिघे में फसल उगाते हैं. वे बताते हैं कि फसल के उपज होने के साथ-साथ बाजार की चिंता रहती है. अच्छी कीमत के लिए बाजार में खरीदारों की संख्या अधिक होनी चाहिए, तभी जाकर वस्तु की मांग बढ़ती है. ऐसे में बाजार का दायरा छोटा होने के कारण स्थानीय खरीदारों पर निर्भर रहना पड़ता है. खरीदार किसानों से कम मूल्य पर फसल खरीद कर उसे अच्छी कीमत में बेंच देते हैं. किसान अरुण महतो से फेसबुक की पूछी गयी, तो उन्होंने बताया कि किसानों को बड़े बाजार की जरूरत है. तभी खेती करनेवाले सुख-चैन से रह सकते हैं.
खेतों में सूख रहे धान
किसान गोविंद नाथ पांडेय ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र अब तक नहीं खुल पाये हैं, जिससे किसानों का धान खेतों में सूख रहे हैं. साथ ही बदलते मौसम में धान खराब होने की संभावना बनी हुई है, जिससे किसानों के सामने व्यापारियों के हाथ आधे दाम में ही धान को बेचना पड़ रहा है. किसान गोविंद ने बताया कि नवंबर माह से क्रय केंद्र खुल जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक कई प्रखंडों में क्रय केंद्र नहीं खुल पाये हैं. बक्सर प्रखंड के पांडेयपट्टी पैक्स केंद्र, व्यापार मंडल और एफसीसी में भी धान क्रय बंद हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के किसान बिक्री को लेकर खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं.
कहते हैं नेता
सीपीआइ नेता सलाहुद्दीन अंसारी ने बताया कि किसानों के सामने लंबे समय से बाजार एक बड़ी चुनौती रहा है, जिसके चलते किसानों ने खुदकुशी तक की है. यदि आधुनिक युग में फेसबुक के माध्यम से किसानों को एक नया बाजार मिल जाता है, तो किसानों को बिचौलियों से छुटकारा मिल जायेगा. इस तरह के कुछ तकनीकी पहल किसानों के हित में जरूरी है. इस तरह की पहल पर किसानों को मदद पहुंचाने के लिए विभिन्न किसान सभा को आगे आना चाहिए.
