बक्सर : सरकार को राजस्व प्रदान करनेवाला मानव जीवन का अंतिम पड़ाव श्मशान घाट अव्यवस्था का शिकार बना हुआ है. सरकारी उपेक्षा का आलम यह है कि श्मशान घाट सूर्यास्त के बाद अंधेरे में डूब जाता है. चारों तरफ गंदगी पसरा हुआ है. रातों में रोशनी की व्यवस्था तक नहीं है. पीने के लिए पानी की भी व्यवस्था नहीं. चौसा-बक्सर मुख्य मार्ग से घाट पर जानेवाला मार्ग कीचड़ से सना हुआ रहता है तथा इस पर नाली बहता रहता है.
श्मशान घाट की दशा : नगर पर्षद का कोष मजबूत करनेवाला बक्सर का श्मशान घाट स्वयं दुर्दशा का शिकार है. चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है. थोड़ी बारिश होने पर घाट पर पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है. चारों तरफ विक्रेताओं द्वारा अपनी लकड़ी अव्यवस्थित रूप से रख कर व्यवधान पैदा किया गया है. पीने के पानी का अभाव भी घाट पर दिखायी देता है. घाट पर लगा नल खराब होकर अस्तित्व खो दिया है.
कहां से आते हैं लोग : हर व्यक्ति जो पृथ्वी पर आया है, उसका अंत निश्चित होता है. उसकी अंतिम यात्र श्मशान घाट पर आकर समाप्त हो जाती है. बक्सर स्थित श्मशान घाट ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व रखता है. इसके वजह से न केवल जिले के लोग बल्कि समीपवर्ती जिले रोहतास एवं भोजपुर के लोग भी मुख्य रूप से बक्सर श्मशान घाट पर पहुंचते हैं. मान्यता है कि इस जगह अंतिम यात्र कर पंचतत्व में विलीन होने के बाद मानव शरीर सभी पापों से मुक्त हो जाता है. बक्सर में माता गंगा उत्तरायणी दिशा में प्रवाहित होती है, जो पाप-मुक्ति में सहायक सिद्ध होती है.
रोशनी की व्यवस्था : नगर पर्षद को पर्याप्त राजस्व देनेवाला बक्सर श्मशान घाट रोशनी विहीन है. पूरे घाट परिसर में एक बल्ब तक रोशनी के नाम पर नहीं है. रोशनी के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा सोलर लाइट लगाया गया था जो अब अपना अस्तित्व खो चुका है. श्मशान घाट के विकास एवं आधुनिकीकरण के तहत लगे सोलर प्लेट पर उचक्कों की नजर पड़ी कि कुछ सोलर प्लेट तक गायब हो गये. श्मशान घाट पर रोशनी यदि दिखती है, तो वह चिता में लगी आग के जलने से दिखती है. इनसान तो इनसान की सहायता कर नहीं पाता, पर श्मशान घाट पर जलती चिता ही शवयात्र में शामिल लोगों को रोशनी दिखाता है.
लकड़ी की व्यवस्था : आम तौर पर नगर पर्षद द्वारा ही सभी श्मशान घाट पर लकड़ी के दाम लगे चार्ट लगाया जाता है. पर, बक्सर जैसे ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल पर लकड़ी वगैरह के दामों का कोई चार्ट नहीं टंगा है. बाहर से आये लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. शवयात्र में आये लोगों को लकड़ी विक्रेताओं से तू-तू-मैं-मैं होते रहता है. अंतत: लोग लकड़ी विक्रेताओं को मुंह मांगी रकम चुकाते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
श्मशान घाट पर रोशनी के लिए विभागीय जेइ को बत्ती लगाने का निर्देश दे दिया गया है. लकड़ी का दाम निर्धारित करने का काम नप की नहीं है. सफाई की बात है तो उसे दिखवा लेंगे. आवश्यक सफाई करायी जायेगी.
अनिल कुमार
कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पर्षद
