जब होगी मानवाधिकारों की रक्षा, तभी होगा सबका विकास

बक्सर,कोर्ट : विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश का अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार हरिंद्रनाथ के नेतृत्व में कैंडल जुलूस निकाला गया. इसके पूर्व एक कार्यक्रम का आयोजन विधिक सेवा सदन में किया गया. इस अवसर पर अपने संबोधन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि समाज के हर व्यक्ति […]

बक्सर,कोर्ट : विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश का अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार हरिंद्रनाथ के नेतृत्व में कैंडल जुलूस निकाला गया. इसके पूर्व एक कार्यक्रम का आयोजन विधिक सेवा सदन में किया गया. इस अवसर पर अपने संबोधन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि समाज के हर व्यक्ति के मानवाधिकार का रक्षा होना चाहिए.

सभी को समान रूप से स्वतंत्र वातावरण में जीने का अधिकार है, इसके लिए संविधान में कई प्रावधान बनाये गये हैं. उन्होंने कहा कि कैंडल जुलूस का उद्देश्य लोगों को मानवाधिकार के प्रति अधिक से अधिक जागरूक करना है. लगभग 5 बजे जिला विधिक सेवा कदम से जिला जज एवं अन्य न्यायिक पदाधिकारियों ने कैंडिल जुलूस की शुरूआत की जो अंबेडकर चौक तक जाकर समाप्त हुई.
जुलूस में शामिल लोग तख्तियां एवं बैनर के साथ मार्च किए इस अवसर पर एडीजे ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव, एडीजे सुमन कुमार सिंह, एडीजे राकेश कुमार मिश्रा, एडीजे शशिकांत चौधरी, न्यायिक पदाधिकारी सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार राजेश कुमार त्रिपाठी, न्यायाधीश धर्मेंद्र तिवारी, न्यायाधीश राकेश रंजन सिंह, दीवान फहद खान ,मुक्तेश मनोहर, पैनल अधिवक्ता दिवाकर मिश्रा, श्यामाश्री ,रवि रंजन सिन्हा, ज्योति शंकर, रानी तिवारी, आरती कुमारी, विद्यासागर तिवारी अशोक पाठक आदि कई अधिवक्ता एवं पीएलवी शामिल थे.
बंदियों को बताया गया मानवाधिकार
बक्सर,कोर्ट. फांसी के फंदे के निर्माण को चर्चा में लेकर विशेष चर्चा में अचानक आये केंद्रीय कारा में मंगलवार को विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर न्यायाधीश राजेश कुमार त्रिपाठी, जेल सुपरिटेंडेंट विजय कुमार अरोड़ा, जेलर सतीश कुमार, ओपेन जेल के सहायक अधीक्षक सरोज कुमार अशोक पाठक के अलावे ओपेन जेल के पैनल अधिवक्ता उपस्थित थे.
इस अवसर पर श्री त्रिपाठी ने मानव अधिकार के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दिया. उन्होंने बंदियों को मिलने वाली मानवाधिकार एवं संविधान में दिए गए विशेष अधिकारों को लेकर विस्तार से जानकारी दिया. वहीं जेल अधीक्षक विजय कुमार अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि 10 दिसंबर 1950 से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा पूरे विश्व में मानवाधिकार दिवस मनाने की शुरूआत की गयी.
भारत में 1993 से इस संबंध में आयोग बनाया गया. उन्होंने कहा कि वैसे तो 1948 में ही संयुक्त राष्ट्र एसेंबली द्वारा मानवाधिकार पर चर्चा की गई थी .उन्होंने कहा कि बंदियों को भी मौलिक अधिकार की सुरक्षा जरूरी है.

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