Bihar News: (संतोष कांत) बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को हाईटेक और पारदर्शी सेवा देने का दावा पिछले 24 दिनों से खुद शॉर्ट सर्किट का शिकार बना हुआ है. विभाग ने पुराने बिलिंग और उपभोक्ता प्रबंधन सॉफ्टवेयर को हटाकर नया एडवांस्ड बिलिंग एवं सेंट्रलाइज्ड सिस्टम लागू तो कर दिया, लेकिन अधूरी तैयारी और तकनीकी खामियों के कारण पूरी व्यवस्था चरमरा गई है. स्थिति यह है कि पिछले तीन सप्ताह से न तो बिजली बिलों में सुधार हो पा रहा है, न नए कनेक्शन जारी हो रहे हैं और न ही लोड ट्रांसफर जैसे जरूरी कार्य पूरे हो पा रहे हैं. विभागीय कार्यालयों में परेशान उपभोक्ताओं की भीड़ लगी हुई है, जबकि कर्मचारी भी सिस्टम फेल होने के कारण लाचार नजर आ रहे हैं.
आखिर क्यों बदला गया सॉफ्टवेयर?
सूत्रों के अनुसार, पुराना बिलिंग और उपभोक्ता डेटाबेस सॉफ्टवेयर काफी पुराना हो चुका था. राज्य में तेजी से लगाए जा रहे प्रीपेड और स्मार्ट मीटरों के रियल टाइम डेटा को पुराने सिस्टम से जोड़ने में लगातार दिक्कतें आ रही थीं. इसके अलावा, बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं द्वारा एक साथ ऑनलाइन भुगतान या मोबाइल ऐप के उपयोग से सर्वर क्रैश होने की समस्या भी आम हो गई थी. साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और मैन्युअल बिलिंग गड़बड़ियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से विभाग ने नए सॉफ्टवेयर को लागू करने का फैसला लिया थ.
कहां फंसा पूरा मामला?
तकनीकी विशेषज्ञों और विभागीय इंजीनियरों के अनुसार, इस संकट के पीछे तीन बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक चूक सामने आई हैं.
1. डेटा माइग्रेशन बना सबसे बड़ी परेशानी
विभाग के पास उपभोक्ताओं का वर्षों पुराना रिकॉर्ड मौजूद है, जिसमें बिलिंग हिस्ट्री, बकाया राशि, सिक्योरिटी डिपॉजिट और सब्सिडी संबंधी डेटा शामिल है.जब इस पुराने डेटा को नए सर्वर पर माइग्रेट किया गया, तब लाखों उपभोक्ताओं के रिकॉर्ड का फॉर्मेट नए सिस्टम से मेल नहीं खा पाया. इसके कारण कई उपभोक्ताओं के अकाउंट ब्लॉक हो गए या सिस्टम में एरर दिखने लगा.
2. बिना ट्रायल रन पूरे सिस्टम को कर दिया लाइव
आईटी नियमों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर सॉफ्टवेयर बदलने से पहले किसी एक जिले या सब-डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर टेस्टिंग की जाती है. वहां आने वाली तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद ही सिस्टम को बड़े स्तर पर लागू किया जाता है. लेकिन विभाग ने बिना पर्याप्त टेस्टिंग के पूरे सिस्टम को एक साथ लाइव कर दिया. जैसे ही सर्वर पर लोड बढ़ा, पूरा नेटवर्क ठप पड़ गया.
3. कोडिंग और कस्टमाइजेशन में भारी गड़बड़ी
जिस निजी आईटी कंपनी को सॉफ्टवेयर कस्टमाइजेशन की जिम्मेदारी दी गई थी, वह स्थानीय जरूरतों और पुराने सिस्टम की संरचना को सही तरीके से समझ नहीं सकी.ग्रामीण और शहरी टैरिफ, सरकारी सब्सिडी और कृषि कनेक्शनों से जुड़े पुराने कोडिंग स्ट्रक्चर को नए सॉफ्टवेयर के साथ सिंक करने में तकनीकी टीम को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कैश काउंटरों पर हाहाकार, कर्मचारी भी परेशान
इस तकनीकी विफलता का सबसे ज्यादा असर बिजली दफ्तरों और सहायता केंद्रों पर देखने को मिल रहा है. उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, क्योंकि ऑनलाइन ऐप और पोर्टल भी सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं. दूसरी ओर, फील्ड स्टाफ और कंप्यूटर ऑपरेटरों को नए सॉफ्टवेयर की पर्याप्त ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है. कई कर्मचारियों के पास लॉगिन एक्सेस तक उपलब्ध नहीं है. उपभोक्ता जब बिल सुधार के लिए पहुंच रहे हैं, तो स्क्रीन पर “डेटा नॉट फाउंड” या “सिस्टम एरर” दिखने के कारण कर्मचारी भी हाथ खड़े कर दे रहे हैं.
इन सेवाओं पर पूरी तरह लगा ब्रेक
- बिजली बिल में गड़बड़ी सुधार का काम ठप
- नए घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन लंबित
- नाम सुधार और लोड बढ़ाने-घटाने की प्रक्रिया बंद
- ऑनलाइन भुगतान और बिल अपडेट प्रभावित
विभाग को रोजाना करोड़ों का नुकसान
24 दिनों से बिलिंग प्रक्रिया प्रभावित होने के कारण बिजली विभाग को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है. समय पर बिलिंग और राजस्व संग्रह नहीं होने से विभाग का रेवेन्यू ग्राफ लगातार गिर रहा है. बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावित हुई है.
विभाग का दावा – जल्द सामान्य होगी व्यवस्था
इस पूरे मामले पर विभाग के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों और मुख्य अभियंता का कहना है कि पुराने सर्वर से नए सर्वर पर डेटा मैपिंग का करीब 80 से 85 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है.
अधिकारियों के अनुसार, कुछ कोडिंग एरर्स को दूर करने के लिए आईटी टीम और सॉफ्टवेयर इंजीनियर लगातार काम कर रहे हैं. अगले तीन से चार दिनों के भीतर सभी तकनीकी खामियों को ठीक कर सिस्टम को पूरी तरह सामान्य करने का दावा किया गया है.
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