सावन की पहली सोमवारी आज

सावन महीने की पहली सोमवारी को शिवालयों में बाबा भोलेनाथ पर जल चढ़ाने को श्रद्धालुओं की सुविधा के मदेनजर सभी शिवालयों को आकर्षक ढंग से सजाया –सवारा गया है.

शेखपुरा. सावन महीने की पहली सोमवारी को शिवालयों में बाबा भोलेनाथ पर जल चढ़ाने को श्रद्धालुओं की सुविधा के मदेनजर सभी शिवालयों को आकर्षक ढंग से सजाया –सवारा गया है. शिवालयों के रंग -रोगन के साथ ही उसे आकर्षक रंग बिरंगी रौशनी से सजाया गया है. इसके साथ ही हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा से लेकर पेयजल सहित अन्य इंतजाम किए गए हैं. सावन की शुरुआत होते ही भक्तों के भीड़ जुटने के कारण शिवमंदिर गुलजार हो गए है. मंदिरों में मेला सा नजारा है. बोल बम और जय भोलेनाथ के जयकारों से शिव मंदिर गूंज रहे हैं. शेखपुरा में कई शिवमंदिर बेहद पौराणिक और प्रसिद्ध होने के कारण श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है.इनमें गिरिहिंडा पहाड़ पर अवस्थित बाबा कामेश्वर नाथ शिव मंदिर और बरबीघा के कुसेढ़ी गांव स्थित पंचबदन स्थान शिवमंदिर लोगों के बीच विशेष लोकप्रिय है. महाभारत कालीन गिरिहिंडा पहाड़ पर अवस्थित बाबा कामेश्वर नाथ शिवमंदिर

गिरिहिंडा पहाड़ पर अवस्थित बाबा कामेश्वरनाथ शिवमंदिर आकर्षण का केंद्र है. करीब तीन सौ फीट ऊंचाई पर बसे इस शिव मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. मंदिर में स्थापित इस शिवलिंग की स्थापना महाभारत कालीन भीम के द्वारा किए जाने की बात कही जाती है. ऐसी किवदंती है कि अपने अज्ञातवास के काल में भीम शेखपुरा शहर के इस गिरिहिंडा पर्वत पर रहता था. इसी स्थल पर हिडिम्बा नाम की राक्षसी रहती थी ,जिससे भीम का गंधर्व विवाह हुआ था. गिरिहिंडा पहाड़ पर शिव मंदिर का निर्माण अंग्रेज के शासन काल में ही शुरू हुआ. जो बाद में कई काल खंड में इसका विकास लोगों के सहयोग से वर्तमान स्वरूप में है. सावन मास के हर सोमवार को गिरिहिंडा पहाड़ पर अवस्थित शिव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

पंचमुखी शिवलिंग कारण लोगों में प्रसिद्ध है कुसेढ़ी स्थान शिवमंदिर

मेंहुस -बरबीघा सड़क पर अवस्थित पंचबदन स्थान मंदिर में अवस्थित शिवलिंग अन्य मंदिरों की तरह नहीं है. बरबीघा के कुसेढ़ी गांव का पंचबदन स्थान श्रद्धालुओं के लिए अनोखा धार्मिक स्थल है. यहां भगवान शंकर की पंचमुखी प्रतिमा है. जो ग्रेनाइट काले पत्थरों की बनई हुई है. यह प्रतिमा अपने आप में दुर्लभ है. यह प्रतिमा 14 वीं शताब्दी में जमीन के अंदर खुदाई के दौरान मिली थी. वर्तमान में शेखपुरा जिला के साथ ही आसपास के जिलों से भी लोग यहां पूजा -अर्चना को आते हैं. सावन माह के शुरू होने के बाद यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है और मेला लगा रहता है. इसी तरह से बरबीघा और शेखपुरा शहर में भी कई शिव मंदिर हैं. इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी सैंकड़ों शिवमंदिर हैं.जहां सावन के पहली सोमवारी पर लोग पूजा अर्चना करेंगे.

बरबीघा डाकघर में पूरा सावन मिलेगा गंगोत्री का शुद्ध गंगाजल

मात्र 30 प्रति बोतल में उपलब्ध

फोटो 09. बोतल में गंगा जल.

संवाददाता बरबीघा. सावन के महीने में भगवान शिव पर गंगाजल चढ़ाने की लालसा रखने वाले शिव भक्तों के लिए खुशखबरी है.इस बार सावन के पूरे महीने तक बरबीघा डाकघर में गंगोत्री से लाया गया शुद्ध गंगाजल उपलब्ध रहेगा.इस संबंध में जानकारी देते हुए शाखा डाकपाल अरुण कुमार ने बताया कि भारतीय डाक विभाग की ओर से विशेष पहल के तहत गंगाजल की बिक्री शुरू की गई है.उन्होंने बताया कि गंगाजल की एक बोतल की कीमत मात्र ₹30 रखी गई है, ताकि हर वर्ग के श्रद्धालु इसे सहजता से प्राप्त कर सकें.यह शुद्ध गंगाजल उत्तराखंड के गंगोत्री से संग्रहित किया गया है और पूरी तरह से पैकिंग के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है.दरअसल सावन माह में भगवान शिव की पूजा में गंगाजल का विशेष महत्व होता है. ऐसे में यह पहल श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सुविधा साबित होगी.डाकपाल अरुण कुमार ने लोगों से अपील की है कि वे डाकघर पहुंचकर आसानी से गंगाजल प्राप्त करें और सावन की पूजा-अर्चना को सफल बनाएं.डाक विभाग की इस पहल की लोग सराहना कर रहे हैं, क्योंकि इससे अब दूर-दराज से गंगाजल लाने की आवश्यकता नहीं होगी. बरबीघा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को अब गंगाजल के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी.

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By SANTOSH KUMAR SINGH

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