बेमौसम बारिश ने बिगाड़ा खेती का गणित

बारिश ने कृषि व्यवस्था और मौसम चक्र को लेकर चिंता खड़ी कर दी है

बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट बिहारशरीफ (नालंदा). जिले में मई माह के शुरुआती दिनों में हुई लगातार बारिश ने कृषि व्यवस्था और मौसम चक्र को लेकर नयी चिंता खड़ी कर दी है. सामान्य तौर पर मई का महीना तेज गर्मी और लू के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ दिख रहा है. जिले में मई माह में सामान्य वर्षापात 22.6 मिमी माना जाता है, लेकिन इस वर्ष पांच मई तक ही 34.21 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है. यह सामान्य से करीब 51 प्रतिशत अधिक है. सबसे अधिक बारिश जिला मुख्यालय बिहारशरीफ क्षेत्र में रिकॉर्ड की गई है. किसानों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलता मौसम पैटर्न भविष्य की खेती, विशेषकर धान उत्पादन के लिए खतरे का संकेत है. जिले के पिछले दो दशकों के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि मई महीने में बेमौसम बारिश की आवृत्ति लगातार बढ़ रही है. सबसे चौंकाने वाला वर्ष 2021 रहा, जब मई माह में रिकॉर्ड 315.3 मिमी वर्षा दर्ज की गयी. यह सामान्य वर्षा से लगभग 1295 प्रतिशत अधिक थी. इसके अलावा 2009 और 2014 में भी 100 मिमी से अधिक बारिश हुई थी. खरीफ सीजन पर संकट के बादल कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मई और जून के बीच रोहिणी नक्षत्र से पहले जमीन का पर्याप्त गर्म होना जरूरी माना जाता है. यही गर्मी धान की नर्सरी और खेत तैयार करने के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है, लेकिन लगातार बारिश और बढ़ती नमी से खेतों की तैयारी प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो खरीफ फसल, खासकर धान की बुआई और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. जलभराव और मिट्टी की अधिक नमी फसल चक्र को भी प्रभावित कर सकती है. बेन प्रखंड के बभनियावां गांव निवासी वरिष्ठ किसान अर्जुन प्रसाद कहते हैं कि मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. उनके अनुसार पहले मई की शुरुआत तेज धूप और गर्म हवाओं से होती थी. अब लगातार बादल और बारिश हो रही है. रोहिणी नक्षत्र से पहले बारिश धान की खेती के लिए शुभ नहीं मानी जाती. किसान 2021 जैसी स्थिति दोबारा बनने से डर रहे हैं. बदल रहा मई का बारिश का पैटर्न वर्ष 2004 के बाद अब तक सात से अधिक बार मई महीने में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है. हाल के वर्षों में यह बदलाव और तेज हुआ है. वर्ष 2020 में 62.16 मिमी वर्षा हुई. 2024 में 59.22 मिमी बारिश दर्ज की गई. 2026 में पांच दिनों में ही 34.21 मिमी वर्षा हो चुकी है. विश्लेषण से स्पष्ट है कि मई माह में बारिश की तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ी हैं. मौसम वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत मान रहे हैं. पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की नमी बना कारण : कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र हरनौत की साइंटिस्ट एंड हेड डॉ सीमा कुमारी ने बताया कि इन दिनों हो रही बारिश के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी प्रमुख कारण हैं. गर्म और ठंडी हवाओं के टकराव से प्री-मानसून बारिश हो रही है. विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हैं, जिससे मौसम चक्र असंतुलित हो रहा है. इसका असर खेती पर पड़ रहा है. किसानों को जल निकासी, मौसम पूर्वानुमान पर नजर और सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, जबकि आम लोगों को भी खराब मौसम में सावधानी रखने को कहा गया है.

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By Dharmendra kumar

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