राष्ट्रीय पोषण पुनर्वास की हुई समीक्षा

कुपोषण एक गंभीर समस्या है, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बाधित करती है़ विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है़

बिहारशरीफ. कुपोषण एक गंभीर समस्या है, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बाधित करती है़ विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है़ कुपोषित बच्चों की संख्या को कम करने के लिए सरकार कई योजनाएँ चला रही है, जिनमें राष्ट्रीय पोषण पुनर्वास केंद्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है़ सदर अस्पताल में ऐसी व्यवस्था की गई है़ शुक्रवार को अस्पताल के सभागार में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच प्रशिक्षण का आयोजन किया गया़ मौके पर सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ़ कुमकुम प्रसाद ने बताया कि कुपोषण के कई कारण हैं, जिनमें संतुलित आहार की कमी, गरीबी, अशिक्षा, बार-बार होने वाली बीमारियां, स्वच्छता की कमी और गर्भवती महिलाओं का कुपोषण शामिल हैं. इन कारणों से बच्चे पर्याप्त पोषण नहीं पा पाते और कमजोर हो जाते हैं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है़ राष्ट्रीय पोषण पुनर्वास केंद्र ऐसे गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए काम करता है़ यहां 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को 14 से 21 दिनों तक विशेष देखभाल में रखा जाता है़ इस दौरान बच्चों को पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयाँ और स्वच्छता संबंधी सुविधाएँ दी जाती हैं. इसके अलावा, माताओं को भी पोषण और स्वच्छता के बारे में जागरूक किया जाता है. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला समन्वयक डॉ़ प्रमोद कुमार पटेल ने कहा कि एनआरसी में भर्ती होने वाले बच्चों और उनकी माताओं को सरकार द्वारा वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है़ यह योजना खासकर उन क्षेत्रों में कारगर साबित हो रही है, जहाँ कुपोषण की समस्या अधिक है़ उन्होंने कर्मियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कुपोषित बच्चों की पहचान करें और उन्हें एनआरसी में भर्ती इसके लिए गाँवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें. एनआरसी केंद्र बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने और स्वस्थ जीवन देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है़ इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है़ उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कुपोषण से होने वाली बीमारियों व मृत्यु दर में कमी आती है़ स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. मौके पर डॉ़ प्रेम शंभू, डॉ़ उमाकांत प्रसाद, डॉ़ अविनाश चंद्र ,डॉ़ अरुण कुमार सिन्हा, डॉ़ राजीव रंजन ,डॉक्टर मनीष कुमार, पोषण सलाहकार नेहा कुमारी,उज्जवल कुमार, साजिद हुसैन व अन्य लोग मौजूद थे़

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By Santosh kumar singh

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