Nalanda News : (कंचन कुमार) नालंदा जिले में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. पिछले तीन दिनों में तापमान 27-28 डिग्री से बढ़कर 39-40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है.
लोगों के बीच यह आशंका गहराने लगी है कि कहीं वर्ष 2024 में दर्ज 47 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड इस बार टूट न जाए. दोपहर में सड़कें सूनी दिख रही हैं और लू से लोग बेहाल हैं.
विश्वप्रसिद्ध मलमास मेला पर संकट
स्थिति इसलिए अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि 17 मई से राजगीर में विश्वप्रसिद्ध मलमास मेला शुरू हो चुका है. 15 जून तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है.
स्वास्थ्य विभाग ने मेले में स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और प्राथमिक उपचार केंद्र सक्रिय किए हैं. मौसम विभाग ने नालंदा को हीटवेव प्रभावित क्षेत्र घोषित करते हुए लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे तक घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है.
भीषण गर्मी से किसान बेहाल
जिले में भीषण गर्मी का इतिहास पहले भी खतरनाक रहा है. 14 जून 2024 को तापमान 47 डिग्री तक पहुंचा था, जबकि हीटस्ट्रोक से तीन लोगों की मौत हुई थी. विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती गर्मी का सबसे अधिक असर भूजल स्तर पर पड़ रहा है. सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट में कई इलाकों में भूजल 11 मीटर तक नीचे जाने की बात कही गई है.
गर्मी का असर खरीफ खेती पर भी दिखने लगा है. किसान धान की नर्सरी लगाने से बच रहे हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में जिले को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है.
