भक्तिभावना और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ मुनि सुब्रत स्वामी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव

भक्तिभावना और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ तीन दिवसीय भगवान मुनि सुब्रत स्वामी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव मंगलवार को संपन्न हो गया.

राजगीर.

भक्तिभावना और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ तीन दिवसीय भगवान मुनि सुब्रत स्वामी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव मंगलवार को संपन्न हो गया. इस महोत्सव में मुंबई सहित देश के अनेकों राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए. महोत्सव के अंतिम दिन निकाले गये शोभा यात्रा में श्रद्धालु नाचते गाते शामिल हुए. मंगलवार को नौलाख मंदिर में मुनिसुब्रत स्वामी का स्नात्र महोत्सव एवं शकस्तव अभिषेक किया गया. शाम में मुंबई के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन के साथ संध्या आरती का भव्य आयोजन किया गया. इस अवसर पर प्रभु की विशेष अंगरचना भी की गयी. इस अवसर पर मुंबई के समीर भाई महेता ने कहा कि जैन धर्म का शास्वत मंत्र नवकार है. इसकी आराधना से मनुष्य को काफी लाभ होता है. वह अपने जीवन का कल्याण कर सकता है. राजगीर तीर्थाधिपति भगवान मुनिसुब्रत स्वामी की चार कल्याणक की पावन भूमि पर यह आयोजन उल्लेखनीय है. भगवान महावीर का संदेश जियो और जिने दो का अगर पालन किया जाये तो पूरे विश्व में शांति कायम हो सकती है. अभी पूरा विश्व युद्ध की विभिषका से जुझ रहा है. कोमल भाई मेहता ने कहा की राजगीर में ऐसा आकर्षण है कि यहां भगवान मुनिसुब्रत स्वामी के साथ जैन धर्म के कई तीर्थंकरों के चरण पडे हैं. महावीर स्वामी जी भी इस नगर में विचरण किये हैं. यहाँ का कण-कण पवित्र है. संस्था के ट्रस्टी रणवीर कुमार जैन ने कहा कि हमलोग भाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म बिहार में हुआ है. यह जैन धर्म के कई तीर्थकरों की कर्मभूमि तथा निर्वाण भूमि है. विभिन्न प्रदेशों से पधारे तीर्थयात्रियों का उनके द्वारा उनकी अनुमोदना की गयी. ट्रस्टी कवींद्र कुमार कोठारी ने कहा कि राजगीर ही एक ऐसी तीर्थ है, जहां कई धर्मों का समावेश एक साथ हुआ है. इस तरह का आयोजन राजगीर में होने से नई उर्जा का संचार होता है. राजगीर के कण कण में प्रभु विराजमान हैं. सहायक प्रबंधक ज्ञानेंद्र पाण्डेय ने कहा कि नौलखा मंदिर का अपना एक अलग महत्व है. इस मन्दिर के निर्माण में लौह पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया गया है. राजस्थान के कुशल कारीगरों ने छह वर्षों की परिश्रम से इसे तैयार किया है. इस कार्यक्रमों में वीरायतन की मुख्य संरक्षिका साध्वी डाॅ सम्प्रज्ञा जी महाराज, साध्वी साधना जी महाराज के अलावे जिमी मेहता, प्रभुलाल संघवी, परेश संघवी, दीपेश भाई, नीलेश भाई, वीरेंद्र सुचन्ती, पंकज सुचन्ती, भुपत भाई, ज्येन्द्र कोठारी, अशोक डगली, डाॅ जयनंदन पाण्डेय, डाॅ अनिल कुमार, डाॅ जनार्दन उपाध्याय, योगेंद्र उपाध्याय, रामकृष्ण प्रसाद सिंह, ज्ञानचंद जैन, पारस शाह, ललीत शाह, निपुन मेहता, रमेशचंद भूरा, सुशील कुमार जैन, मिहीर भाई, गुणवंती बेन, मधु बेन, नमीता जैन, गीता बेन, प्रिया बेन, प्रेमलता बेन, पुनम बेन, पूर्णीमा जैन, रेखा जैन, कंचन जैन, रूपा जैन, सुधीर कुमार उपाध्याय, गीतम मिश्रा, ब्रह्मदेव उपाध्याय, जगन्नाथ तिवारी, प्रेमचंद अग्रवाल, डाॅ गणेश शंकर पाण्डेय, कैशियर संजीव कुमार जैन, सतेंद्र कुमार सहित अनेक प्रमुख लोग शामिल हुए.

भक्तिभावना और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ तीन दिवसीय भगवान मुनि सुब्रत स्वामी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव मंगलवार को संपन्न हो गया. इस महोत्सव में मुंबई सहित देश के अनेकों राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए. महोत्सव के अंतिम दिन निकाले गये शोभा यात्रा में श्रद्धालु नाचते गाते शामिल हुए. मंगलवार को नौलाख मंदिर में मुनिसुब्रत स्वामी का स्नात्र महोत्सव एवं शकस्तव अभिषेक किया गया. शाम में मुंबई के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन के साथ संध्या आरती का भव्य आयोजन किया गया. इस अवसर पर प्रभु की विशेष अंगरचना भी की गयी. इस अवसर पर मुंबई के समीर भाई महेता ने कहा कि जैन धर्म का शास्वत मंत्र नवकार है. इसकी आराधना से मनुष्य को काफी लाभ होता है. वह अपने जीवन का कल्याण कर सकता है. राजगीर तीर्थाधिपति भगवान मुनिसुब्रत स्वामी की चार कल्याणक की पावन भूमि पर यह आयोजन उल्लेखनीय है. भगवान महावीर का संदेश जियो और जिने दो का अगर पालन किया जाये तो पूरे विश्व में शांति कायम हो सकती है. अभी पूरा विश्व युद्ध की विभिषका से जुझ रहा है. कोमल भाई मेहता ने कहा की राजगीर में ऐसा आकर्षण है कि यहां भगवान मुनिसुब्रत स्वामी के साथ जैन धर्म के कई तीर्थंकरों के चरण पडे हैं. महावीर स्वामी जी भी इस नगर में विचरण किये हैं. यहाँ का कण-कण पवित्र है. संस्था के ट्रस्टी रणवीर कुमार जैन ने कहा कि हमलोग भाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म बिहार में हुआ है. यह जैन धर्म के कई तीर्थकरों की कर्मभूमि तथा निर्वाण भूमि है. विभिन्न प्रदेशों से पधारे तीर्थयात्रियों का उनके द्वारा उनकी अनुमोदना की गयी. ट्रस्टी कवींद्र कुमार कोठारी ने कहा कि राजगीर ही एक ऐसी तीर्थ है, जहां कई धर्मों का समावेश एक साथ हुआ है. इस तरह का आयोजन राजगीर में होने से नई उर्जा का संचार होता है. राजगीर के कण कण में प्रभु विराजमान हैं. सहायक प्रबंधक ज्ञानेंद्र पाण्डेय ने कहा कि नौलखा मंदिर का अपना एक अलग महत्व है. इस मन्दिर के निर्माण में लौह पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया गया है. राजस्थान के कुशल कारीगरों ने छह वर्षों की परिश्रम से इसे तैयार किया है. इस कार्यक्रमों में वीरायतन की मुख्य संरक्षिका साध्वी डाॅ सम्प्रज्ञा जी महाराज, साध्वी साधना जी महाराज के अलावे जिमी मेहता, प्रभुलाल संघवी, परेश संघवी, दीपेश भाई, नीलेश भाई, वीरेंद्र सुचन्ती, पंकज सुचन्ती, भुपत भाई, ज्येन्द्र कोठारी, अशोक डगली, डाॅ जयनंदन पाण्डेय, डाॅ अनिल कुमार, डाॅ जनार्दन उपाध्याय, योगेंद्र उपाध्याय, रामकृष्ण प्रसाद सिंह, ज्ञानचंद जैन, पारस शाह, ललीत शाह, निपुन मेहता, रमेशचंद भूरा, सुशील कुमार जैन, मिहीर भाई, गुणवंती बेन, मधु बेन, नमीता जैन, गीता बेन, प्रिया बेन, प्रेमलता बेन, पुनम बेन, पूर्णीमा जैन, रेखा जैन, कंचन जैन, रूपा जैन, सुधीर कुमार उपाध्याय, गीतम मिश्रा, ब्रह्मदेव उपाध्याय, जगन्नाथ तिवारी, प्रेमचंद अग्रवाल, डाॅ गणेश शंकर पाण्डेय, कैशियर संजीव कुमार जैन, सतेंद्र कुमार सहित अनेक प्रमुख लोग शामिल हुए.

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By Prabhat Khabar News Desk

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