Deceased Tenant Jamabandi : बिहार में जमीन के राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त करने और वास्तविक हकदारों के नाम दर्ज करने की कवायद तेज कर दी गयी है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने मृत रैयतों के नाम से चल रही जमाबंदी को उनके पात्र उत्तराधिकारियों के नाम अपडेट करने को प्राथमिकता दी है. प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने हलका क्षेत्र में हर महीने कम से कम पांच मृत जमाबंदी मामलों का निष्पादन करना होगा.
अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मियों को निर्देश
इस संबंध में पटना में गया, नालंदा और शेखपुरा के सभी अंचल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने अधिकारियों को राजस्व मामलों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन करने तथा राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने का निर्देश दिया.
मृत रैयत की जगह उत्तराधिकारी का नाम होगा दर्ज
वर्षों से मृत रैयतों के नाम पर चल रही जमाबंदियों को चिन्हित किया जाएगा. इसके बाद पात्र उत्तराधिकारियों के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड अपडेट किया जायेगा. विभाग का मानना है कि इससे जमीन के वास्तविक हकदारों का नाम रिकॉर्ड में दर्ज होगा और भविष्य में उत्तराधिकार, दाखिल-खारिज समेत अन्य राजस्व कार्यों में होने वाली परेशानियां कम होंगी.
डिजिटाइज्ड जमाबंदी की गलतियां भी होंगी दूर
रिकॉर्ड सुधार अभियान केवल मृत रैयतों की जमाबंदी तक सीमित नहीं रहेगा. डिजिटाइज्ड जमाबंदी में दर्ज गलत प्रविष्टियों को भी चिन्हित कर सुधारने का अभियान चलाया जाएगा. सरकारी भूमि से आच्छादित जमाबंदियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है.
परिमार्जन प्लस से रिकॉर्ड सुधार की सुविधा
विभाग की ओर से परिमार्जन प्लस के माध्यम से डिजिटाइज्ड जमाबंदी में दर्ज गलत प्रविष्टियों में सुधार की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है. इसका उद्देश्य पुराने और त्रुटिपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड को सही और अपडेट रखना है.
रैयत नहीं पहुंचा तो भी तय तारीख पर होगी मापी
लंबित मापी मामलों को लेकर भी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये गये हैं. रैयत की अनुपस्थिति को मापी लंबित रखने का आधार नहीं बनाया जाएगा. संबंधित रैयत को निर्धारित तिथि की सूचना व्यक्तिगत रूप से और उपलब्ध मोबाइल नंबर पर दी जाएगी.
पंचायत भवन और अंचल कार्यालय में भी सूचना
मापी की निर्धारित तिथि की सूचना पंचायत भवन और अंचल कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी प्रदर्शित करनी होगी. प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय तारीख पर मापी हर हाल में कराने का निर्देश दिया गया है.
ई-मापी से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
बिहार में ई-मापी व्यवस्था के माध्यम से रैयत मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके साथ ही आवेदन की स्थिति की जानकारी भी ऑनलाइन देखी जा सकती है.
गलत दस्तावेज से दाखिल-खारिज पर कार्रवाई
दाखिल-खारिज के दौरान गलत दस्तावेज या गलत तथ्य प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. दस्तावेजों की जांच के साथ जमीन की वास्तविक स्थिति की भी पड़ताल होगी. इसके लिए अमीनों को स्थल पर जाकर स्पॉट वेरिफिकेशन करने का निर्देश दिया गया है.
सरकारी जमीन की गलत जमाबंदी भी जांच के दायरे में
सरकारी भूमि पर गलत तरीके से कायम जमाबंदी की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है. दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के दौरान सरकारी भूमि से जुड़ी जमाबंदियों की जांच और रिकॉर्ड से मिलान करने पर भी विभाग ने जोर दिया है.
अतिक्रमण वाद अब ऑनलाइन चलेंगे
सभी अंचलों में लंबित अतिक्रमण वादों का संचालन राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली यानी आरसीएमएस के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन करने का निर्देश दिया गया है. इससे राजस्व न्यायालयों में चल रहे मामलों की कार्यवाही और स्थिति ऑनलाइन उपलब्ध होगी तथा उनकी निगरानी आसान होगी.
डिजिटल रिकॉर्ड के साथ मैदानी निगरानी
बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से नागरिक ऑनलाइन जमाबंदी देखने, दाखिल-खारिज की स्थिति जानने और ई-मापी के लिए आवेदन करने जैसी सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं. परिमार्जन प्लस के माध्यम से डिजिटाइज्ड जमाबंदी में दर्ज गलत प्रविष्टियों में सुधार की सुविधा भी उपलब्ध है. जमाबंदी में बदलाव होने पर एसएमएस अलर्ट की सुविधा दी गयी है.
हर महीने पांच मृत जमाबंदी मामलों का लक्ष्य
विभाग ने राजस्व कर्मचारियों की मैदानी जवाबदेही भी तय की है. प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने हलका क्षेत्र में हर महीने कम से कम पांच मृत जमाबंदी मामलों का निष्पादन करना होगा. इसके जरिये लंबित मामलों को तेजी से निपटाने का प्रयास किया जा रहा है.
देरी और लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही
सचिव जय सिंह ने अधिकारियों को राजस्व कार्यों का निष्पादन समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से करने का निर्देश दिया है. बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि अनावश्यक देरी या लापरवाही सामने आने पर संबंधित की जवाबदेही तय की जाएगी.
जमीन रिकॉर्ड को लगातार अपडेट करने पर जोर
राजस्व विभाग की इस कवायद में मृत रैयतों के नाम की जमाबंदी, गलत प्रविष्टियां, लंबित मापी, गलत दस्तावेज के आधार पर दाखिल-खारिज और सरकारी जमीन की गलत जमाबंदी जैसे मामलों को शामिल किया गया है. विभाग का फोकस अब केवल राजस्व रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने पर नहीं, बल्कि उसे सही व्यक्ति, सही जमीन और सही अधिकार के अनुरूप लगातार अपडेट और दुरुस्त करने पर है.
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