Bihar Teacher: बिहार में 3000 शिक्षकों के नौकरी पर लटकी तलवार, नये साल से पहले विभाग ने लिया एक्शन

Bihar Teacher: बिहार में शिक्षक व्यवस्था से जुड़े दो बड़े खुलासों ने पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ फर्जी प्रमाणपत्रों पर बहाली के मामलों में निगरानी विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है, तो दूसरी ओर ड्यूटी से बिना सूचना गायब रहने वाले शिक्षकों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है.

Bihar Teacher: बिहार के शिक्षा विभाग में इन दिनों ‘ऑपरेशन क्लीन’ की लहर चल रही है जिसने फर्जीवाड़े और लापरवाही की जड़ें हिला दी हैं. एक तरफ जहां निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 2912 नियोजित शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाते हुए उन पर थानों में FIR दर्ज करा दी है.

दूसरी ओर हाजिरी में खेल करने वाले 1257 शिक्षकों पर भी विभाग का चाबुक चलने वाला है. यह खबर उन तमाम शिक्षकों के लिए खतरे की घंटी है जो या तो जाली दस्तावेजों के सहारे सालों से वेतन उठा रहे थे या बिना सूचना दिए स्कूलों से गायब रहते थे. पटना हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अब विभाग और निगरानी ब्यूरो आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं.

फर्जी डिग्री पर नौकरी

पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर पिछले एक दशक से चल रही जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में 2005 से 2015 के बीच बहाल 2912 नियोजित शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं. इसके बाद राज्य के अलग-अलग जिलों में थानों में एफआईआर दर्ज की जा रही है. 30 नवंबर तक कुल 1707 FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें कई मामलों में एक ही केस में एक से अधिक शिक्षकों को आरोपी बनाया गया है.

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जेएस गंगवार के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक 126 नई FIR दर्ज की जा चुकी हैं। अब तक 6 लाख 46 हजार 796 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच की जा चुकी है और यह प्रक्रिया हर महीने समीक्षा के आधार पर आगे बढ़ रही है।

फर्जी डिग्री का रैकेट

जांच के दौरान सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि फर्जी डिग्रियां जारी करने वाले बोर्ड और विश्वविद्यालयों का नेटवर्क भी सामने आया है. सत्यापन के दौरान पता चला कि कुछ संस्थान वर्षों से फर्जी डिग्री के सहारे सरकारी नौकरी दिलाने का रैकेट चला रहे थे. ऐसे बोर्ड और यूनिवर्सिटी अब निगरानी एजेंसियों के रडार पर हैं. अधिकारियों का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई है, उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है और वेतन-भत्तों की वसूली के साथ जेल की सजा भी संभव है.

ड्यूटी से गायब 1257 शिक्षक

शिक्षक अनुशासन को लेकर शिक्षा विभाग की रैंडम जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. क्रिसमस की छुट्टी से ठीक पहले 23 और 24 दिसंबर को की गई जांच में जिले के 1257 शिक्षक बिना सूचना दिए ऑन ड्यूटी नहीं पाए गए. इन शिक्षकों ने न तो ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की और न ही किसी प्रकार की छुट्टी का आवेदन दिया था.

आंकड़ों के अनुसार जिले के 3419 स्कूलों में कुल 25,219 शिक्षक कार्यरत हैं. इन दो दिनों में 18,727 शिक्षकों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की, जबकि 5,235 शिक्षक छुट्टी पर थे. सबसे ज्यादा 200 अनुपस्थित शिक्षक पटना सदर अर्बन प्रखंड से पाए गए. वहीं बख्तियारपुर प्रखंड में दो शिक्षक ऐसे भी मिले जिन्होंने अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में एक बार भी ई-शिक्षा पोर्टल नहीं खोला.

शिक्षकों के साथ अफसर भी रडार पर

जिला शिक्षा कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि बिना सूचना अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निलंबन और आगे की विभागीय कार्रवाई तय है. इसके साथ ही ऐसे शिक्षकों को संरक्षण देने वाले प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी है. शिक्षा विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि लापरवाही या मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

प्रशासन का दावा है कि सख्ती का यह दौर आगे भी जारी रहेगा और आने वाले समय में हजारों और शिक्षकों पर कार्रवाई हो सकती है. यह अभियान सिर्फ फर्जी डिग्री या गैरहाजिरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम की सफाई की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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