Bihar Politics: बिहार में आरक्षण और दलित वोट को लेकर नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सभी वर्गों की चिंता पर बातचीत की बात कही, तो तेजस्वी यादव ने उनके रुख पर सवाल खड़े कर दिए. अब आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है.
आरक्षण पर चिराग के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
बिहार की राजनीति में इन दिनों दलित वोट को लेकर नेताओं के बीच खींचतान दिखाई दे रही है. इसी बीच चिराग पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर ऐसी बात कही, जिसमें उन्होंने सिर्फ दलित और पिछड़े वर्ग की नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग की चिंता का भी जिक्र किया. इसके बाद उनके बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई.
चिराग ने कहा कि समाज के अलग-अलग हिस्सों में अपने भविष्य को लेकर चिंता है. उनका मानना है कि सरकार को सभी वर्गों की बात सुननी चाहिए और बातचीत के जरिए रास्ता निकालना चाहिए. उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग, सभी की समस्याओं पर संवाद की जरूरत बताई.
चिराग बोले- एक का हक लेकर दूसरे को फायदा नहीं
चिराग पासवान ने यह भी साफ किया कि किसी एक वर्ग की परेशानी दूर करने के लिए दूसरे वर्ग को मिलने वाला आरक्षण खत्म करना सही रास्ता नहीं है. उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों की रक्षा की बात कही.
सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की बात करते हुए चिराग ने EWS आरक्षण का उदाहरण दिया. केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है. चिराग का कहना है कि ऐसे मुद्दों पर भी बातचीत के जरिए समाधान खोजा जा सकता है.
तेजस्वी ने चिराग को घेरा, आरक्षण पर दी खुली चुनौती
चिराग के बयान पर आरजेडी नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने हमला बोल दिया. तेजस्वी ने कहा कि आरक्षण को खत्म करना इतना आसान नहीं है और ऐसा करने वाला अभी कोई पैदा नहीं हुआ है.
तेजस्वी ने एनडीए के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कई नेता आरक्षित सीटों से चुनाव जीतकर राजनीति में पहुंचे हैं और सत्ता का हिस्सा हैं. इसके बावजूद वे ऐसी ताकतों के साथ खड़े हैं जिन पर आरक्षण के खिलाफ होने के आरोप लगते रहे हैं.
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तेजस्वी बोले- आरक्षण से दिक्कत है तो सामान्य सीट से लड़ें
तेजस्वी यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए नेताओं को सीधी चुनौती भी दी. उन्होंने कहा कि अगर किसी नेता को आरक्षण की व्यवस्था या उसके नियमों से परेशानी है, तो वह अपने पद और आरक्षित सीट से इस्तीफा देकर सामान्य सीट से चुनाव लड़कर दिखाए.
तेजस्वी के इस बयान के बाद चिराग पासवान को लेकर सियासी चर्चा और बढ़ गई. एक तरफ चिराग सभी वर्गों की चिंता पर बातचीत की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ तेजस्वी उनके रुख को सवालों के घेरे में रख रहे हैं.
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