Bihar Police: बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक अहम फैसला लिया है. राज्य में भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था से जुड़ी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को हर हाल में नेम प्लेट लगाना जरूरी होगा. ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी की वर्दी पर उसका नाम और पद साफ-साफ दिखाई देना चाहिए. नियम की अनदेखी करने वाले जवानों पर निलंबन समेत विभागीय कार्रवाई हो सकती है.
जानकारी के मुताबिक, यह आदेश सिर्फ धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा. राजनीतिक रैलियों, छात्र आंदोलनों, दुर्गापूजा, दीपावली, छठ जैसे बड़े त्योहारों, मेलों और अन्य भीड़भाड़ वाले आयोजनों में भी पुलिसकर्मियों को नेम प्लेट के साथ ड्यूटी करनी होगी. इसके अलावा वीआईपी मूवमेंट, दंगा नियंत्रण अभ्यास, इमरजेंसी कानून-व्यवस्था ड्यूटी, रात की गश्त, चेकपोस्ट और नाकेबंदी के दौरान भी यही नियम लागू रहेगा.
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, बड़े आयोजनों और प्रदर्शनों में असामाजिक तत्व भीड़ का फायदा उठाकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं. आशंका यह भी रहती है कि कोई शरारती तत्व सादी वर्दी या आधी-अधूरी पुलिस ड्रेस का फायदा उठाकर पुलिसकर्मियों के बीच घुस सकते हैं और आम लोगों या प्रदर्शनकारियों पर हमला कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में दोषी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है और आरोप पुलिस पर भी आ सकता है. ऐसे में नेम प्लेट होने जरूरी होगा.
जवान ही नहीं, अफसर भी होंगे जिम्मेदार
मुख्यालय ने सिर्फ पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय नहीं की है. किसी भी संवेदनशील ड्यूटी पर जवानों की रवानगी से पहले संबंधित थाना प्रभारी और डीएसपी स्तर के अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी पुलिसकर्मी वर्दी और नेम प्लेट में हैं या नहीं. अगर मौके पर कोई जवान बिना नेम प्लेट के मिला, तो सिर्फ उसी पर कार्रवाई नहीं होगी. बल्कि उसके दल प्रभारी यानी टीम लीडर की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी. इसे लेकर एडीजी विधि-व्यवस्था केएस अनुपम ने जानकारी दी.
पुलिस की जवाबदेही होगी सुनिश्चित
अक्सर प्रदर्शन या लाठीचार्ज के दौरान पुलिसकर्मियों की पहचान को लेकर सवाल उठते हैं. प्रदर्शन के दौरान अगर लाठीचार्ज हो तो कई बार पुलिसकर्मियों पर बिना नेम प्लेट के ड्यूटी में रहने का आरोप लगाया जाता है. ऐसे में नेम प्लेट सिर्फ पहचान का जरिया नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का माध्यम भी बनेगी.
किसी को शिकायत करनी हो या किसी पुलिसकर्मी के व्यवहार पर सवाल उठाना हो, तो उसकी पहचान करना आसान होगा. इससे असली पुलिस और पुलिस की आड़ में छिपे उपद्रवियों के बीच फर्क करना आसान होगा और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में जवाबदेही भी बढ़ेगी.
