Bihar News: बिहार में पिछले डेढ़ महीने से राज्यभर के राजस्व अधिकारियों और सरकार के बीच गतिरोध कम होती दिख रही हैं. बिहार राजस्व सेवा संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि नई सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाती है, तो वे तुरंत काम पर लौटने को तैयार हैं.
जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और मापी जैसे महत्वपूर्ण कामों के ठप होने से आम आदमी से लेकर रियल एस्टेट सेक्टर तक में जो गतिरोध पैदा हुआ था, उसके अब जल्द ही सुलझने की उम्मीद है.
नई सरकार से उम्मीद, बातचीत को तैयार अफसर
राजस्व सेवा संघ के पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि वे सरकार के साथ संवाद के लिए पूरी तरह तैयार हैं. संघ के अध्यक्ष आदित्य शिवम शंकर के अनुसार, यदि सरकार उनकी मांगों पर सहमति जताती है और निलंबन जैसी कार्रवाई वापस ली जाती है, तो हड़ताल खत्म कर दी जाएगी.
इस पूरे आंदोलन की जड़ में डीसीएलआर (डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स) पद को लेकर विवाद है. नियम के मुताबिक 9 साल की सेवा पूरी करने के बाद राजस्व अधिकारियों को इस पद पर परमोशन मिलनी चाहिए, लेकिन फिलहाल इन पदों पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तैनाती की जा रही है. यही असंतोष हड़ताल का मुख्य कारण बना.
कैबिनेट फैसले पर उठे सवाल
संघ की पहली मांग उस कैबिनेट प्रस्ताव को वापस लेने की है, जिसमें डीसीएलआर का पद प्रशासनिक सेवा को सौंप दिया गया था. राजस्व अधिकारी चाहते हैं कि इस पद को फिर से उनके लिए आरक्षित किया जाए, ताकि सेवा नियमों का पालन हो सके.
दूसरी बड़ी मांग जिला भू-अर्जन अधिकारी के पद को लेकर है. संघ का कहना है कि यह पद राजस्व सेवा के लिए निर्धारित है, लेकिन यहां भी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है, जो नियमों के खिलाफ है.
हड़ताल से ठप पड़े हैं जमीन के काम
राजस्व अधिकारियों (CO) ने साफ कर दिया है कि वे विकास कार्यों में बाधा नहीं बनना चाहते, बस अपनी सेवा शर्तों में न्याय की मांग कर रहे हैं. पुरानी मांगों पर लिखित आश्वासन मिलते ही CO अंचलों में मोर्चा संभाल लेंगे. अगर ऐसा होता है, तो अगले कुछ दिनों में बिहार के अंचल कार्यालयों में रौनक लौटेगी और जनता के अटके हुए जमीन संबंधी काम तेजी से निपट सकेंगे.
9 मार्च से चल रही इस हड़ताल का असर सीधे आम लोगों पर पड़ा है. जमीन रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन और अन्य राजस्व कार्य लगभग ठप हो गए हैं. हालांकि विभाग का दावा है कि 1100 में से 589 अधिकारी काम पर लौट चुके हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हैं.
