Mahila Rojgar Yojana: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत प्रदेश की लगभग 1 करोड़ 81 लाख महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का मेगा प्लान तैयार किया गया है. योजना के पहले चरण में महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिए जा चुके हैं, जिसका उपयोग ग्रामीण इलाकों में किराने की दुकान, बकरी पालन और सिलाई-बुनाई जैसे छोटे व्यवसायों के लिए किया गया है.
अब ग्रामीण विकास विभाग की ‘जीविका’ इकाई ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि किन महिलाओं ने वास्तव में रोजगार शुरू किया है और किन्हें अगली किस्त मिलनी चाहिए.
छोटे निवेश से शुरू हुआ गांवों में काम
प्रारंभिक रिपोर्ट बताती है कि कई महिलाओं ने इस राशि से गांवों में किराना दुकान खोली, बकरी पालन शुरू किया और सिलाई-बुनाई जैसे घरेलू रोजगार अपनाए हैं. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में छोटे स्तर पर गतिविधियां बढ़ी हैं और महिलाओं की आय के नए स्रोत बने हैं.
जिन महिलाओं ने राशि लेने के बाद कोई काम शुरू नहीं किया है, उन्हें चिह्नित किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में अगली किस्त मिलने में बाधा आ सकती है. हालांकि विभाग का कहना है कि पहले उन्हें रोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि योजना का असली उद्देश्य पूरा हो सके.
चरणबद्ध निवेश से बढ़ेगा कारोबार
सरकार की यह योजना केवल खैरात बांटने के बारे में नहीं है, बल्कि महिलाओं को ‘बिजनेस पार्टनर’ बनाने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति है. दूसरे चरण में महिलाओं को 20 हजार रुपये दिए जाएंगे, लेकिन शर्त यह है कि उन्हें 5 हजार रुपये खुद की बचत से निवेश करने होंगे. इसी तरह, तीसरे चरण में 40 हजार रुपये की सरकारी मदद के साथ महिलाओं को 10 हजार रुपये खुद लगाने होंगे.
चौथे चरण में सरकार 80 हजार रुपये की बड़ी राशि देगी, जिसमें 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत निवेश अनिवार्य होगा. यह ‘मैचिंग ग्रांट’ मॉडल महिलाओं में जिम्मेदारी और व्यापार के प्रति गंभीरता पैदा करने के लिए बनाया गया है.
ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए मिलेंगे अलग से पैसे
जब महिलाएं अपना छोटा व्यवसाय स्थापित कर लेंगी, तो अंतिम चरण में सरकार उनके काम को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद करेगी. इसके लिए मार्केटिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग मद में अलग से 60 हजार रुपये की राशि दी जाएगी.
जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा के अनुसार, अगर कोई महिला असाधारण प्रदर्शन करती है, तो राज्य कमेटी की अनुशंसा पर उसे एकमुश्त 2 लाख रुपये तक की राशि भी दी जा सकती है. इसका उद्देश्य बिहार के ग्रामीण उत्पादों को एक राष्ट्रीय पहचान दिलाना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है.
जांच की रडार पर हैं ‘फर्जी’ लाभार्थी
योजना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है. अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन महिलाओं ने पहली किस्त लेकर कोई रोजगार शुरू नहीं किया है, उन्हें चिह्नित किया जा रहा है.
ऐसी महिलाओं को न केवल अगली किस्तों से वंचित किया जा सकता है, बल्कि उन्हें रोजगार शुरू करने के लिए कड़ी हिदायत और प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि भविष्य का बजट किन महिलाओं के खातों में ट्रांसफर किया जाना है. बिहार की आधी आबादी के लिए यह सुनहरा मौका है कि वे अपने हुनर को एक सफल बिजनेस में बदल सकें.
Also Read: अब यादों में लालू प्रसाद की ‘कुर्ता फाड़’ होली, दोस्त के साथ राजनीतिक विरोधी भी आते थे गले लगाने
