बिहार चुनाव में बेरोजगारी, ‘कृषि क्षेत्र को कारोबारी घरानों को सौंपने’ जैसे मुद्दे होंगे : तेजस्वी

नयी दिल्ली : विधानसभा चुनाव के पहले बिहार के लिए केंद्र द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणा किए जाने के बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि ‘दिखावटी प्रचार कवायद’ शासन के लिए खराब विकल्प है और चुनाव में बेरोजगारी, ‘कृषि क्षेत्र को कारोबारी घरानों के हाथ में सौंपने’, कोविड-19 महामारी से निपटने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे.

नयी दिल्ली : विधानसभा चुनाव के पहले बिहार के लिए केंद्र द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणा किए जाने के बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि ‘दिखावटी प्रचार कवायद’ शासन के लिए खराब विकल्प है और चुनाव में बेरोजगारी, ‘कृषि क्षेत्र को कारोबारी घरानों के हाथ में सौंपने’, कोविड-19 महामारी से निपटने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे.

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता यादव ने पीटीआई-भाषा को एक साक्षात्कार में कहा कि यह ‘निर्विवाद और सिद्ध’ है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) महागठबंधन का स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता है और जल्द ही सीटों का बंटवारा हो जाएगा. तीन कृषि विधेयकों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद ने हमेशा किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है और ‘कृषि क्षेत्र को कारोबारी घरानों’ के हाथ में सौंपने के खिलाफ पूरी ताकत से पार्टी लड़ेगी.

तेजस्वी ने कहा, ‘‘इन विधेयकों से किसानों का वित्तीय सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा जो कि उन्हें सरकारी खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसे प्रावधानों से मिल रहा था.” अगर विधेयक ‘किसान विरोधी’ नहीं हैं तो एक केंद्रीय मंत्री ने क्यों इस्तीफा दे दिया. कृषि विधेयक के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. तेजस्वी यादव ने जोर दिया कि उनकी पार्टी लोगों के मुद्दों के आधार पर बिहार चुनाव में लड़ेगी.

राजद नेता ने कहा कि ‘‘बेरोजगार युवाओं, लोकतंत्र और संविधान समर्थक ताकतों के विरूद्ध निरंकुश, विभाजनकारी और संविधान विरोधी शासन” की लड़ाई होगी. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘बिहार चंपारण सत्याग्रह जैसे राजनीतिक आंदोलन की भूमि है और मैं आश्वस्त हूं कि यह चुनाव मौजूदा राजनीतिक विमर्श में ऐतिहासिक क्षण होगा.” क्या बिहार चुनाव में सुशांत सिंह राजपूत मामला भी चुनावी मुद्दा होगा, यह पूछे जाने पर यादव ने कहा, ‘‘सुशांत की मौत के मामले में सबसे पहले हमने सीबीआई जांच की मांग की थी और अब जांच शुरू हो गयी है तो हमारा इसमें भरोसा है और परिणाम का इंतजार करेंगे.”

उन्होंने कहा, ‘‘हमने कभी इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया और ना ही इसे बनाना चाहिए. बिहार में बेरोजगारी, कृषि क्षेत्र को कारोबारी घरानों को सौंपने, बेलगाम भ्रष्टाचार, बदहाल स्वास्थ्य सुविधाएं, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, शिक्षा, निरंकुश नौकरशाही जैसे बड़े मुद्दे हैं.” तेजस्वी यादव ने कहा कि कोविड-19 महामारी से निपटने और प्रवासी मजदूरों से किया गया बर्ताव भी महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे. यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने 15 साल के कार्यकाल में इन सभी मोर्चें पर बुरी तरह नाकाम रहे हैं. राजद सुनिश्चित करेगा कि बिहारी लोगों की जिंदगी और भविष्य से संबंधित असली मुद्दों को उठाया जाए.

क्या वह विपक्षी गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे और महागठबंधन में राजद की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर तेजस्वी यादव ने कहा कि यह निर्विवाद और सिद्ध है कि महागठबंधन में राजद स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता है और अब भी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है. उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास जो भी जिम्मेदारी है, मैं ईमानदारी से उसे निभा रहा हूं और भविष्य में भी ऐसा ही करूंगा. फिलहाल में बिहार में सबसे भ्रष्ट और जन विरोधी सरकार को हटाने के लिए अथक प्रयास कर रहा हूं.”

तेजस्वी यादव ने जोर दिया कि देश और बिहार में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है जिसका समाधान होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘लंबे समय से 4.5 लाख से ज्यादा पद खाली हैं और मैंने बिहार के युवाओं को आश्वस्त किया है कि हमारी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में इन रिक्तियों को भरने का काम शुरू होगा और निर्धारित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी की जाएगी.” साथ ही कहा कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो सरकारी नौकरियों में ‘डोमिसाइल नीति’ को भी लागू किया जाएगा.

केंद्र द्वारा बिहार के लिए विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरूआत करने के बारे में पूछे जाने पर तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि ऐन चुनाव के पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए परियोजनाओं की घोषणा करना मुख्यमंत्री कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजमाया हुआ तरीका है. राजद नेता ने कहा कि बिहार जानना चाहता है कि 1.65 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का क्या हुआ, जिसकी घोषणा मोदी ने 2015 के प्रचार अभियान के दौरान की थी.

उन्होंने कहा, ‘‘बिहारी जानते हैं कि बढ-चढ़कर किए गए दावों का क्या हुआ. बिहार को विशेष दर्जा के वादों का क्या हुआ.” यादव ने कहा, ‘‘‘दिखावटी प्रचार कवायद’ शासन के लिए खराब विकल्प है. नीतीश जी बिहार से दोबारा छल नहीं कर सकते. काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती.” नीतीश कुमार और जद(यू) पर लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख चिराग पासवान के हमले के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि यह राजग का मामला है, लेकिन लोग देख रहे हैं कि राजग का एक घटक कैसे अपनी ही सरकार, उसकी नीतियों पर सवाल कर रहा है.

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नीतीश कुमार पर हमला करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि सुशासन और विकास की उनकी बातें छलावा हैं. तेजस्वी यादव ने कहा, ‘‘अगर नीतीश कुमार को अपनी उपलब्धियों पर गर्व है तो वह अकेले क्यों नहीं चुनाव लड़ते हैं? मैं लिख कर दे सकता हूं, वह अकेले चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.” बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को खत्म हो रहा है और चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होने की संभावना है.

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