पटना से अनुराग प्रधान की रिपोर्ट
Bihar Education Department: बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य में पहली से आठवीं क्लास तक के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर (लर्निंग आउटकम) में सुधार और शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नयी पहल शुरू की है. इसके तहत राज्य स्तर पर चार अलग-अलग व्हाट्सएप चैनल बनाए गए हैं, जिनसे संबंधित अधिकारियों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को अनिवार्य रूप से जोड़ा जायेगा.
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों, जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और शिक्षक शिक्षा संस्थानों के प्राचार्यों को लेटर जारी किया है. लेटर में कहा गया है कि मेंटरिंग व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए यह कदम उठाया गया है.
चार फेज के लिए बनाए गए अलग-अलग चैनल
शिक्षा विभाग ने स्कूली शिक्षा के अलग-अलग फेज के अनुसार चार व्हाट्सएप चैनल तैयार किए हैं-
- फाउंडेशनल स्टेज (क्लास 1-2)
- प्रिपरेटरी स्टेज (क्लास 3-5)
- मिडिल स्टेज (क्लास 6-8)
- कॉम्प्लेक्स रिसोर्स सेंटर (सीआरसी)
इन चैनलों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और संसाधन केंद्रों के प्रभारी आपस में जुड़ेंगे और शैक्षणिक गतिविधियों, ट्रेनिंग, मार्गदर्शन और मॉनिटरिंग से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे.
क्यूआर कोड और लिंक से जुड़ना होगा
शिक्षा विभाग ने हर चैनल के लिए क्यूआर कोड और लिंक उपलब्ध कराया है. निर्देश में कहा गया है कि सभी संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि उनके अधीन काम कर रहे शिक्षक और प्रधानाध्यापक निर्धारित चैनलों से जुड़ जाएं.
सीखने के परिणामों में सुधार पर फोकस
लेटर में कहा गया है कि क्लास 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मेंटरिंग आधारित व्यवस्था लागू की जा रही है. इसके जरिए शिक्षकों को नियमित शैक्षणिक सहयोग, मार्गदर्शन और आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराई जायेंगी.
अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारी
प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला और प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को व्हाट्सएप चैनलों से जोड़ने की प्रक्रिया जल्द पूरी कराएं. विभाग का मानना है कि इससे कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत सहयोग और शैक्षणिक निगरानी को मजबूती मिलेगी. शिक्षा विभाग के इस कदम को डिजिटल माध्यम से शिक्षकों तक जल्द सूचना पहुंचाने और स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
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