आक्रोश. एसडीपीओ के बयान से अलग है सच्चाई, लोगों ने पुलिस पर लगाये गंभीर आरोप
आरा : बड़हरा थाना रविवार को मैदान-ए-जंग बन गया. चारों तरफ चीख, पुकार, फायरिंग, भागो, मारो के साथ आगजनी ने इलाके को पूरी तरह से हिला कर रख दिया था. बड़हरा थाने पर हमला पूरी प्लानिंग के साथ हुआ था. एक साथ इतनी भीड़ का जुटना यह स्पष्ट दर्शाता था कि रात में ही इसकी पूरी प्लानिंग कर ली गयी थी.
रविवार को पौ फटने के साथ ही आक्रोशित लोग थाने पर शव के साथ जुट गये थे. पुलिस कुछ समझ पाती कि आक्रोशित लोगों ने थाने को अपने कब्जे में ले लिया. एसडीओ का बयान और सच्चाई कुछ और होने की जानकारी जैसे ही लोगों को मिली, लोग और आक्रोशित हो उठे. किस परिस्थिति में एसडीपीओ संजय कुमार ने यह बयान दिया, यह जांच का विषय है. सूत्रों की मानें तो पूरे कांड का मास्टरमाइंड क्षेत्र का बड़े पद पर बैठा एक ओहदेदार है.
15 किलोमीटर की दूरी तय करने में पुलिस को लग गये चार घंटे : पुलिस को भी इस तरह के प्लानिंग का कोई अनदेशा न था. सूचना के बाद भोजपुर पुलिस को बड़हरा थाने की दूरी तय करने में लगभग चार घंटे का समय लग गया. तब तक उपद्रवी अपनी प्लानिंग को अंजाम दे चुके थे. एसपी भी घटनास्थल पर काफी देर से पहुंचे, जिस कारण पुलिस बलों का मनोबल काफी गिर चुका था. भीड़ पुलिस पर हावी होती जा रही थी. एक पल तो ऐसा आया कि गुस्सायी भीड़ ने एक साथ थाने पर हमला किया तो पुलिस वाले किसी तरह जान बचाते दिखे. बाहर से पथराव और थाने से पुलिस मूकदर्शक बन अपना बचाव करते नजर आयी.
घटना के पीछे सफेदपोशों का हाथ होने की भी है चर्चा : बड़हरा में मचे बवाल के पीछे सफेदपोश लोगों का भी हाथ होने की चर्चा आम रही. हालांकि इस मामले में अभी तक पुलिस के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी दबी जुबान इस बात को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन साक्ष्य के अभाव में कोई कदम नहीं उठा पा रहे हैं. लोगों का कहना है कि छेना ततवा काफी साधारण परिवार से था और इस तरह के बड़े बवाल के पीछे किसी-न-किसी बड़े ओहदे वाले शख्स का हाथ है.
